महिलाएं राष्ट्र निर्माता हैं, केवल गृहणी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाउसवाइफ के घरेलू काम और परिवार की देखभाल को राष्ट्रीय निर्माण में अहम योगदान माना है. अदालत ने गृहिणी को सिर्फ होममेकर नहीं बल्कि नेशन बिल्डर का दर्जा दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शादी करने का मतलब घर में नौकरानी लाना नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के घरेलू योगदान को राष्ट्रीय निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाहित महिलाओं को केवल 'होममेकर' के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें 'नेशन बिल्डर' का दर्जा दिया जाना चाहिए। अपने एक ऐतिहासिक फैसले में, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि विवाह का अर्थ घर में एक नौकरानी को लाना नहीं है। यह टिप्पणी महिलाओं द्वारा परिवार और समाज के लिए किए जाने वाले अमूल्य कार्यों को मान्यता देती है।
यह फैसला महिलाओं के घर और परिवार में किए जाने वाले अवैतनिक श्रम को महत्व देता है और इसे राष्ट्रीय विकास में एक आवश्यक योगदान के रूप में स्थापित करता है।
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