बच्चों-बुजुर्गों का रोज का सफर: नीचे नदी, ऊपर बांस की बल्लियां
सोचिए, हर सुबह घर से निकलते वक्त आपको यह तय करना पड़े कि स्कूल, अस्पताल या बाजार पहुंचने से पहले एक 'इम्तिहान' देना होगा. इम्तिहान बैलेंस का. नीचे नदी होगी, ऊपर बांस की बल्लियां, जिन पर चलना है. एक चूक और बड़ा हादसा. बिहार में कटिहार जिले के एक गांव के हजारों लोगों के लिए यह हर दिन की हकीकत है.
बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों निवासियों को बिहार के कटिहार जिले के एक गांव में हर दिन एक खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ता है। स्कूल, अस्पताल या बाजार जाने के लिए उन्हें बांस की बल्लियों से बने एक अस्थायी पुल पर चलना होता है, जिसके नीचे एक नदी बहती है। यह स्थिति निवासियों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि जरा सी चूक से बड़ा हादसा हो सकता है।
यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी और निवासियों द्वारा सामना किए जाने वाले दैनिक जोखिमों को उजागर करती है।
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