ग्राउंड रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में पीने के पानी की गंभीर समस्या
छत्तीसगढ़ के कांकेर का ऐसा गांव, जहां आजादी के 8 दशक भी अब तक साफ पानी का अधिकार तक नहीं मिल पाया है. यहां के लोगों के लिए साफ पानी तक पाना दूर की कौड़ी है. कांकेर के मासपुर में पहाड़ी रास्तों से निकलकर महिलाएं पानी भरती हैं. चट्टानों के बीच निकला पानी जिसे नहीं पता और कितने जानवर भी पीते होंगे. देखें ये ग्राउंड रिपोर्ट.
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मासपुर गांव में आजादी के 80 साल बाद भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। स्थानीय निवासियों को पानी के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता है, और वे जिस स्रोत से पानी लाते हैं वह भी प्रदूषित और जानवरों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला है। महिलाएं पहाड़ी रास्तों से चट्टानों के बीच से निकलने वाले इस पानी को भर कर लाती हैं। यह स्थिति दशकों से बनी हुई है और साफ पानी तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती है। यह रिपोर्ट ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। सरकार द्वारा इस गंभीर समस्या के समाधान के प्रयास अब तक अपर्याप्त रहे हैं।
यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के एक गांव में स्वच्छ पेयजल की गंभीर कमी और उसके मानवीय प्रभाव को दर्शाती है।
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