12 दिन से गायब हैं 'करण-अर्जुन', अब कर्नाटक से आए कॉल ने बढ़ाई बेचैनी

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फिल्म 'करन-अर्जुन' में दोनों भाई बिछड़ते हैं और फिर लौट आते हैं. लेकिन रांची के धुर्वा से गायब हुए असली करण और अर्जुन की कहानी में अभी तक वापसी वाला सीन नहीं आया है. 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन दोनों भाइयों का कोई सुराग नहीं मिला. उल्टा एक रहस्यमयी फोन कॉल ने इस पूरे मामले को और उलझा दिया है.

12 दिन पहले रांची के धुर्वा से दो भाई घर से निकले और फिर जैसे हवा में गायब हो गए. मां दर-दर बच्चों को तलाश रही है, पुलिस सुराग ढूंढ रही है और पूरा मोहल्ला इंतजार में है. इसी बीच एक फोन आता है. दूसरी तरफ मौजूद शख्स कहता है- आपके बच्चे अस्पताल में हैं... कर्नाटक में. बस, यहीं से करण और अर्जुन की गुमशुदगी की कहानी में ऐसा मोड़ आया, जिसने रहस्य को और गहरा कर दिया.

रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से करण और अर्जुन नाम के दो भाई लापता हैं. परिवार का कहना है कि बच्चों की तलाश में उन्होंने हर संभव कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली. मां डॉली देवी की आंखें दरवाजे पर टिकी हैं और हर बजती घंटी उन्हें उम्मीद देती है कि शायद इस बार बच्चों की खबर मिल जाए.

फिर शुक्रवार की रात करीब आठ बजे फोन की घंटी बजी. फोन उठाया गया तो दूसरी तरफ एक अनजान शख्स था. उसने खुद को कर्नाटक से बताया और कहा कि दोनों बच्चे एक अस्पताल में भर्ती हैं. यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई. एक तरफ उम्मीद जगी कि शायद बच्चे मिल जाएं, दूसरी तरफ सवाल खड़ा हो गया कि आखिर बच्चे कर्नाटक कैसे पहुंच गए?

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परिवार ने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी. अब पुलिस उस नंबर की जांच कर रही है, जिससे कॉल आया था. कोशिश यह पता लगाने की है कि फोन करने वाला कौन था और उसने जो जानकारी दी, उसमें कितनी सच्चाई है.

इस बीच मामला सिर्फ एक परिवार की चिंता तक सीमित नहीं रहा. धुर्वा में बच्चों की गुमशुदगी को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. वजह यह है कि 12 दिन बीतने के बावजूद पुलिस के हाथ कोई बड़ी सफलता नहीं लगी है.

मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू बच्चों के परिजनों से मिलने पहुंचे. उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार के बयान और एफआईआर में दर्ज जानकारी के बीच अंतर दिखाई देता है. उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया.

भाजपा ने इसे कानून-व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया है. इसी को लेकर 13 जून की शाम मशाल जुलूस निकालने की घोषणा की गई. पार्टी का कहना है कि अगर बच्चों की बरामदगी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

इस कहानी का एक और पहलू लोगों को परेशान कर रहा है. दरअसल, जनवरी में भी इसी तरह एक बच्चा गायब हुआ था. हालांकि बाद में उसे रामगढ़ से बरामद कर लिया गया था. इसके अलावा रांची की 18 महीने की बच्ची की गुमशुदगी का मामला भी लोगों के जेहन में ताजा है.

उधर पुलिस का दावा है कि जांच में कोई कोताही नहीं बरती जा रही. रांची के एसएसपी राकेश रंजन के मुताबिक, सिटी एसपी की अगुवाई में एसआईटी बनाई गई है और हर एंगल से जांच की जा रही है. लेकिन फिलहाल इस कहानी का सबसे बड़ा किरदार वही रहस्यमयी फोन कॉल है.

क्या सचमुच करण और अर्जुन कर्नाटक के किसी अस्पताल में हैं? क्या फोन करने वाला कोई प्रत्यक्षदर्शी था? या

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