पीएम मोदी ने ट्रंप की मौजूदगी में भारतीय नागरिकों की मौत का किया ज़िक्र लेकिन अमेरिका का नहीं लिया नाम, विपक्ष क्या बोला
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा ज़रूरी है ताकि पूरी दुनिया को जोड़ने वाले नाविक बिना डर के काम कर सकें. उन्होंने भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया लेकिन सीथे-सीधे अमेरिका का नाम नहीं लिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया.
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुक़सान झेलना पड़ा है. साथ ही होर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री व्यापाार में आई बाधा की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा है.इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार के ज़रिये सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है. इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि नाविक बिना डर के काम कर सकें.
ओमान के तट पर 9 जून को कमर्शियल जहाज़ 'सेटेबेलो' पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीयों की मौत हो गई थी. लिहाजा भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाने को अहम माना जा रहा है.
'सेटेबेलो' के अलावा दो भारतीय जहाजों पर भी हमला हुआ था, लेकिन इसमें किसी की जान नहीं गई थी.
फ़्रांस के एवियन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाक़ात हुई.
'ऑपरेशन सिंदूर' और भारत पर लगाए गए भारी अमेरिकी टैरिफ़ से दोनों देशों के रिश्तों में आए तनाव के बाद ट्रंप और मोदी की ये पहली आमने-सामने की मुलाक़ात थी.
जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की दो दिवसीय यात्रा पूरी कर फ़्रांस पहुंचे थे. भारत को इस शिखर सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया था.
जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप है, जिसमें कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.
पीएम मोदी ने समुद्र में नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए आपस में जुड़ी दुनिया के देशों के बीच सहयोग की अपील की.
उन्होंने कहा, ''आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी है. दुनिया के देश पहले से ज़्यादा एक दूसरे पर निर्भर हैं. किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती. मोबिलिटी,डेटा, पूंजी और टेक्नोलॉजी आपस में सभी देशों को जोड़ते हैं.''
उन्होंने कहा ''ऐसे समय में पार्टनरशिप की अहमियत स्वाभाविक तौर पर बढ़ जाती है लेकिन ये तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो. आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति कोई खनिज,टेक्नोलॉजी या बाज़ार नहीं है बल्कि आपसी विश्वास है.''
उन्होंने कहा, ''हमें विश्वास है कि टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को हथियार के तौर पर नहीं बल्कि दुनिया की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. हमारा विश्वास है कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे.हमें भरोसा है कि ग्लोबल संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे.''
अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को ख़त्म करने के लिए एक शांति समझौते पर सहमति बनने की घोषणा की गई है. अम
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