घर के अंदर जूते पहने रहना क्या सेहत के लिए हानिकारक है?
घर के अंदर जूते उतारने या पहने रहने को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है और दुनिया भर में लोग इस पर तुरंत अपनी बात रखते हैं. लेकिन क्या जूते पहने रहने से सच में सेहत को कोई खतरा होता है?
सर्बिया के रहने वाले पेद्ज़ा त्रिफ़ुनोविच जब पहली बार अपनी अमेरिकी गर्लफ़्रेंड सोफ़िया के घर पहुंचे तो अंदर जाने से पहले जूते उतारने लगे. लेकिन सोफ़िया ने जब उनसे कहा कि वो जूते पहने रह सकते हैं तो पेद्ज़ा हैरान रह गए.
उन्होंने तब सोफ़िया से कहा था, "तुम लोग घर के अंदर भी जूते पहने रहते हो क्या, मुझे तो ये बहुत बदतमीज़ी से भरा लगा."
हैरान पेद्ज़ा अकेले नहीं थे. उनकी गर्लफ्रेंड (जो अब उनकी पत्नी हैं) सोफ़िया भी थीं. लेकिन उनकी हैरानी इस बात को लेकर थी कि पेद्ज़ा जूते उतारकर घर में घुसते हैं.
उन्होंने तब पेद्ज़ा को जवाब दिया, "तुम पैरों की बदबू पूरे घर में फैलाना चाहते हो क्या?"
जब दोनों ने अपने विचार ऑनलाइन शेयर किए तो इस पर बहुत सारे रिएक्शन आए. इसे पता लगता है कि जूतों को लेकर सोफ़िया और पेद्ज़ा के बीच हुई ये बहस तो दरअसल पूरी दुनिया में होती रहती है.
दोनों ने एक टिक-टॉक वीडियो डाला जिसमें पेद्ज़ा चप्पल पहने हुए हैं और सोफ़िया ट्रेनर्स में अपने अपार्टमेंट के अंदर दिखती हैं. उस पर सैकड़ों टिप्पणियाँ आईं - लोग बहस कर रहे थे कि कौन ज़्यादा हाइजीनिक है.
तो आख़िर सही कौन है? क्या घर के अंदर जूते पहनना स्वास्थ्य के लिए ख़तरा है? बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने इसका पता लगाने के लिए एक माइक्रोबायोलॉजी लैब का रुख़ किया.
घर के अंदर जूते पहने रहें या उतार के अंदर जाए, इसे लेकर अलग-अलग देशों में लोगों का रवैया भी अलग-अलग है.
ज़्यादातर मध्य-पूर्वी, एशियाई और बाल्कन देशों में घर के अंदर जूते पहने रहना असभ्यता मानी जाती है. वहीं यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में मेहमानों से जूते उतारने को कहना ही बदतमीज़ी समझा जाता है.
जापान में तो जूतों को लेकर बड़े ही सख़्त नियम हैं. वहां के ज़्यादातर घरों में एक विशेष प्रवेश-द्वार होता है जिसे गेनकन कहते हैं, और उसके आगे जूते पहनकर जाने की मनाही होती है.
लंदन के एसओएएस विश्वविद्यालय में मानवशास्त्र (ह्यूमैनिटी) के सीनियर प्रोफ़ेसर डॉक्टर फ़ाबियो ग्यीगी कहते हैं कि अगर कोई पर्यटक घर के बाहर जूते उतारना भूल जाए तो बेहद तीखी प्रतिक्रिया होगी, लोग लगभग आप पर कूद पड़ेंगे कि नहीं, रुको, जूते उतारो.
उनके अनुसार इसकी वजह साफ़-सफ़ाई के साथ-साथ जापानी सोसायटी की फ़िलॉसफ़ी भी है,
वह कहते हैं, "प्रतीकात्मक रूप से बाहर रहने को सभी तरह की गंदगी, ख़तरे और प्रदूषण से जोड़ा जाता है."
वह आगे कहते हैं, "अंदर वह जगह है जिसे आप निर्मल रखना चाहते हैं. पवित्र रखना चाहते हो."
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
हमने ब्रिटेन के ब्राइटन शहर में एक जोड़ी जूतों की लैब में जांच करवाई ताकि पता चल सके कि उन पर क्या-क्या मौजूद है.
ब्राइटन यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सारा पिट ने जूतों के ऊपर और नीचे से नमूने लिए. इन नमूनों को पूरी रात लैब में रखा गया.
अगले दिन माइक्रोस्कोप से जांच करने पर जूतों पर कई तरह के बैक्टीरिया मिले.
इनमें स्टैफिलोकोकस ऑरियस भी था. यह वही बैक्टीरिया है जो स्टैफ संक्रमण का कारण बनता है. डॉ. प
📌 Kaynak
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