फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026: भारतीय मूल के ये चार खिलाड़ी भी हैं इस बार मैदान में
11 जून से शुरू हुए इस टूर्नामेंट के सह-आयोजक मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा हैं और इस बार इसमें रिकॉर्ड 48 देश भाग ले रहे हैं.
भारतीय फ़ुटबॉल प्रशंसकों का भारत की सीनियर टीम का फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में खेलते देखने का सपना इस बार भी अधूरा रह गया है. लेकिन भारतीय मूल के कुछ खिलाड़ी इस साल के वर्ल्ड कप में मैदान पर उतर रहे हैं.
11 जून से शुरू हुए इस टूर्नामेंट के सह-आयोजक मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा हैं और इस बार इसमें रिकॉर्ड 48 देश भाग ले रहे हैं.
इनमें से चार देशों की टीमों में भारतीय मूल के चार फ़ुटबॉल खिलाड़ी खेलते नज़र आएंगे.
2006 में फ़्रांस की ओर से फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप खेलने वाले विकाश धोरासू भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बने थे. लेकिन अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल में उनका प्रदर्शन ख़ास असरदार नहीं रहा.
बीस साल बाद भारतीय प्रशंसक भारतीय मूल के - सरप्रीत सिंह (न्यूज़ीलैंड), निशान वेलुपिल्लै (ऑस्ट्रेलिया), तहसीन मोहम्मद जमशेद (क़तर) और सैमुअल मूटुस्सामी (डीआर कांगो) - को वर्ल्ड कप में खेलते हुए देखेंगे.
1999 में ऑकलैंड में जन्मे सरप्रीत न्यूज़ीलैंड की फ़ुटबॉल टीम में मिडफ़ील्डर हैं.
उनके माता-पिता पंजाब से न्यूज़ीलैंड गए थे. उनका एक बड़ा भाई और एक बहन भी है. परिवार न्यूज़ीलैंड में किराने की दुकान चलाता था.
बचपन में सरप्रीत कई खेल खेलते थे, लेकिन फ़ुटबॉल उनका पहला प्यार था. 2015 में, 16 साल की उम्र में उन्होंने वेलिंगटन फ़ीनिक्स फ़ुटबॉल क्लब से सीनियर डेब्यू किया.
2018 में उन्हें मुंबई में हुए इंटरकॉन्टिनेंटल कप में न्यूज़ीलैंड की सीनियर राष्ट्रीय टीम से डेब्यू करने का मौक़ा मिला. उस टूर्नामेंट में न्यूज़ीलैंड ने सुनील छेत्री की अगुवाई वाली भारतीय टीम को 2-1 से हराया. दोनों गोलों में सरप्रीत ने असिस्ट किए थे.
एक साल बाद उन्होंने अंडर-20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया, जिसने जर्मनी के बायर्न म्यूनिख के स्काउट्स का ध्यान खींचा. जल्द ही उन्हें जर्मनी की शीर्ष फ़ुटबॉल लीग, बुंडेसलीगा, में बायर्न म्यूनिख की ओर से डेब्यू करने का मौक़ा मिला.
सरप्रीत बुंडेसलीगा में खेलने वाले भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बने. इसके बाद वो यूरोपीय फ़ुटबॉल लीगों के कुछ अन्य क्लबों की ओर से भी खेले.
27 साल की उम्र में सरप्रीत न्यूज़ीलैंड के लिए 24 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और तीन गोल किए हैं. क्लब फ़ुटबॉल में उनके नाम 34 गोल दर्ज हैं.
16 जून को 20 साल के हुए तहसीन मोहम्मद जमशेद इस साल के वर्ल्ड कप में क़तर की ओर से विंगर के रूप में खेलेंगे.
तहसीन के पिता जमशेद मूल रूप से केरल के कुन्नूर ज़िले के थलसेरी से हैं और उनकी माँ श्यामा वलापट्टनम से हैं. परिवार 2006 से क़तर में रह रहा है.
जमशेद कालीकट विश्वविद्यालय की ओर से फ़ुटबॉल खेल चुके हैं और उन्होंने अपने बेटे की ट्रेनिंग में अहम भूमिका निभाई.
तहसीन ने क़तर की एस्पायर एकेडमी में प्रशिक्षण लिया और कम उम्र में ही उन्हें अल-दुहैल स्पोर्ट्स क्लब से खेलने का मौक़ा मिल गया था. जल्द ही वह राष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाने में सफल रहे.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल में पदार्पण अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ 2026 वर्ल्ड कप क्वालिफ़ायर मैच में किया.
2024 में दोहा में भा
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