कभी सिर्फ स्कर्ट तो कभी टाइट ड्रेस, जब चर्चा में रही एयर होस्टेस की यूनिफॉर्म?

📌 Diğer 📰 India 🕐 5 saat önce

दुनियाभर के अलग- अलग एयरलाइंस की एक पहचान वहां काम करने वाली एयरहोस्टेस और फ्लाइट अटेंडेंट की यूनिफॉर्म होती है. उनकी ड्रेस से पता चल जाता है कि वो किस एयरलाइन में काम करती हैं. कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब इन यूनिफॉर्म को लेकर विवाद हुआ है. ऐसे में जानते हैं कि किन- किन वजहों से एयर होस्टेस की यूनिफॉर्म चर्चा में रही है.

हवाई जहाज में सफर करते समय यात्रियों का ध्यान अक्सर एयर होस्टेस की यूनिफॉर्म पर जाता है. अलग-अलग एयरलाइंस अपनी पहचान बनाने के लिए खास तरह की ड्रेस डिजाइन करती हैं. लेकिन कई बार यही यूनिफॉर्म विवादों का कारण भी बन जाती है. कहीं महिला कर्मचारियों को सिर्फ स्कर्ट पहनने के लिए मजबूर किया गया तो कहीं नई यूनिफॉर्म पहनने के बाद कर्मचारियों ने त्वचा की बीमारी, सांस लेने में दिक्कत और बाल झड़ने जैसी शिकायतें कर दीं.

कुछ साल पहले हांगकांग की एयरलाइन कैथे पैसिफिक की महिला फ्लाइट अटेंडेंट्स की यूनिफॉर्म को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया था. बीबीसी और साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कैथे पैसिफिक ने पहली बार अपनी महिला फ्लाइट अटेंडेंट्स को नौकरी के दौरान पैंट पहनने की अनुमति देने का फैसला लिया और इस तरह 72 साल से स्कर्ट पहनने की बाध्यता खत्म हो गई.

अब तक एयरलाइन में महिलाओं के लिए सिर्फ स्कर्ट पहनना अनिवार्य था. यूनियन कई वर्षों से इस नियम का विरोध कर रही थी. कर्मचारियों का कहना था कि स्कर्ट पहनकर काम करना कई बार असुविधाजनक होता है. सामान उठाने, झुकने या तेजी से काम करने में दिक्कत होती है. साथ ही यह नियम लैंगिक समानता के भी खिलाफ माना जा रहा था. करीब चार साल तक चले अभियान के बाद एयरलाइन झुकी और पैंट को यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने पर सहमत हुई.

जब यूनिफॉर्म पहनते ही बीमार पड़ने लगे कर्मचारी यूनिफॉर्म से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद अमेरिकी एयरलाइन डेल्टा एयरलाइंस में देखने को मिला था. द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में कई फ्लाइट अटेंडेंट्स ने शिकायत की कि नई बैंगनी रंग की यूनिफॉर्म पहनने के बाद उन्हें त्वचा पर चकत्ते, सांस लेने में परेशानी, बाल झड़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं.

कुछ कर्मचारियों ने दावा किया कि उनकी त्वचा पर ऐसे निशान पड़ गए जो सामान्य रैश नहीं बल्कि केमिकल बर्न यानी रासायनिक जलन जैसे दिखते थे. कई कर्मचारियों को डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर एपिपेन तक साथ रखने की सलाह दी थी.

विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि यूनिफॉर्म को दाग-धब्बों से बचाने और टिकाऊ बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ रसायन इसकी वजह हो सकते हैं. हालांकि, एयरलाइन ने कहा था कि वह कर्मचारियों की शिकायतों पर काम कर रही है और समस्या से प्रभावित लोगों के लिए समाधान तलाश रही है.

अमेरिकन एयरलाइंस में भी उठा था विवाद यूनिफॉर्म से जुड़ी शिकायतें सिर्फ डेल्टा तक सीमित नहीं रहीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट अटेंडेंट ट्रेसी सिल्वर-चैरन ने भी नई यूनिफॉर्म लागू होने के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की थी. उनका कहना था कि काम पर रहते समय उनकी तबीयत बिगड़ जाती थी, लेकिन घर लौटने पर स्थिति बेहतर होने लगती थी.बाद में कई अन्य कर्मचारियों ने भी इसी तरह की शिकायतें की थीं।

अलास्का एयरलाइंस में भी सामने आई थी समस्या हार्वर्ड फ्लाइट अटेंडेंट हेल्थ स्टडी ग्रुप की एक स्टडी में पाया गया कि अलास्का एयरलाइंस में नई यूनिफॉर्म लागू होने के बाद कर्मचारियों में त्वचा

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