अचानक आई मिसाइल परीक्षणों की बाढ़, आखिर क्या तैयारी कर रहा भारत
दोतरफा युद्ध की चुनौतियों और वैश्विक संघर्षों से सीख लेते हुए भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है. ताबड़तोड़ मिसाइल परीक्षण किसी युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और डिटरेंस की गारंटी हैं.
हाल के महीनों में भारत ने अपनी मिसाइलों और रक्षा बुनियादी ढांचे के परीक्षणों में तेजी दिखाई है. हाल ही में किए गए 'लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल'के सफल परीक्षण से लेकर 'अग्नि-प्राइम' और 'प्रलय' जैसी मिसाइलों के बैक-टू-बैक ट्रायल्स ने वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इस रणनीतिक तेजी को देखकर रक्षा गलियारों और आम जनता के बीच कई गंभीर सवाल तैरने लगे हैं- आखिर अचानक इतने सारे परीक्षणों की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या भारत केवल 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार कर रहा है, या फिर यह रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष से सीखे गए सबक का नतीजा है? सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि क्या भारत किसी बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा है?
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भारत द्वारा इस वर्ष किए जा रहे लगातार मिसाइल परीक्षणों के पीछे कोई एक अकेला कारण नहीं है, बल्कि यह एक मल्टीलेवल स्ट्रैटेजिक प्लान का हिस्सा है. इसका पहला और सबसे महत्वपूर्ण आधार आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशीकरण मिशन है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिफेंस इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करने का आक्रामक प्रयास किया है.
DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग के निजी साझेदार अब ऐसी प्रणालियों का विकास कर रहे हैं जो पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' हैं. जब कोई मिसाइल विकास के चरण से गुजरती है, तो उसे सेना में शामिल करने से पहले दर्जनों कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. वर्तमान में जो परीक्षण हम देख रहे हैं, वे दरअसल पिछले एक दशक के अनुसंधान और विकास का परिणाम हैं, जिन्हें अब अंतिम रूप देकर सेना को सौंपा जा रहा है.
दूसरा कारण वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में आया नाटकीय बदलाव है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ 2020 से जारी गतिरोध और वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार चीनी सेना द्वारा बुनियादी ढांचे के आक्रामक आधुनिकीकरण ने नई दिल्ली को अपनी 'डिटेरेंस' को अपग्रेड करने पर मजबूर कर दिया है. मिसाइल परीक्षण केवल तकनीक को परखने के लिए नहीं होते, बल्कि ये दुश्मन देशों को यह बताने के लिए भी होते हैं कि भारत के पास उनकी हर चाल का माकूल जवाब मौजूद है. इसे कूटनीतिक भाषा में 'स्ट्रेटेजिक सिग्नलिंग' कहा जाता है.
आधुनिक युद्धों ने रक्षा रणनीतियों की पुरानी किताबों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. भारतीय सेनाएं दुनिया भर में चल रहे संघर्षों का बहुत बारीकी से अध्ययन कर रही हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब कुछ हफ्तों में खत्म नहीं होते, बल्कि ये लंबे समय तक खिंच सकते हैं.
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इस युद्ध ने भारत को सिखाया है कि लंबी दूरी की क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों का एक विशाल और स्वदेशी भंडार होना कितना जरूरी है. यूक्रेन की तरह अगर भारत विदेशी गोला-बारूद की आपूर्ति पर निर्भर रहा, तो दोतरफा युद्ध की स्थिति
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