FUEL 'कन्फ्यूजन'! पेट्रोल, डीजल, CNG या इलेक्ट्रिक, क्या चुनें कार खरीदार?
गाड़ियों में दिलचस्पी रखने वाले जहां चार लोग इकट्ठा हो रहे हैं वहीं E20... इथेनॉल और फ्लेक्स फ्यूल की चर्चा शुरू हो जा रही है. हालिया सर्वे में भी ये बात सामने आई है कि, पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा और अनिश्चितता के चलते तकरीबन 43% लोगों ने नई कार खरीदने से मना किया है. तो आइये समझते हैं कि, आखिर लोगों की इस दुविधा का क्या कारण है, आखिर फ्यूल पर यूं 'फुल' कन्फ्यूजन क्यों है?
पहले कार खरीदना आसान था. बजट देखिए, मॉडल चुनिए और जरूरी फाइेनेंशियल प्रोसेस पूरा कर चाबी लेकर कार घर ले आ जाइए. लेकिन अब कहानी बदल गई है. कार खरीदने निकलिए और किसी शोरूम में जाकर पूछ लीजिए कि कौन-सी गाड़ी लें. जवाब में सेल्समैन शायद कार से ज्यादा फ्यूल का ज्ञान देने लगे.
पेट्रोल महंगा है, डीजल का भविष्य अधर में है, CNG की कीमतें चढ़ रही हैं, EV में रेंज की चिंता है और हाइब्रिड को नीति निर्माताओं ने मानो साइड सीट पर बैठा रखा है. ऐसा लगता है जैसे ग्राहक कार खरीदने नहीं, बल्कि फ्यूल का गणित समझने निकला है. लेकिन मजे की बात ये है कि इस सवाल का जवाब सरकार, कंपनियों और विशेषज्ञों के पास भी एक जैसा नहीं है.
अब तक कार खरीदने का मतलब सिर्फ यह तय करना होता था कि बजट कितना है और कार किस तरह की लेनी है, हैचबैक, सेडान या एसयूवी. लेकिन 2026 का भारतीय ऑटो बाजार पूरी तरह बदल चुका है. अब सबसे बड़ा सवाल कार का रंग या फीचर्स नहीं, बल्कि उसका फ्यूल है. पेट्रोल, डीजल, CNG, हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, EV या फिर फ्लेक्स-फ्यूल. विकल्प इतने ज्यादा हैं कि आम खरीदार कन्फ्यूजन में है.
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दिलचस्प बात यह है कि इन सभी के अपने-अपने हिसाब से अलग-अलग फायदे और नुकसान भी बताए जा रहे हैं. लेकिन ग्राहक के सामने आज भी कोई एक साफ रास्ता नहीं है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग नई कार खरीदने का फैसला टाल रहे हैं. लोकल सर्किल की हालिया सर्वे में भी ये बात सामने आई है कि, पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा और अनिश्चितता के चलते तकरीबन 43% लोगों ने नई कार खरीदने से मना किया है. तो आइये समझते हैं कि, आखिर लोगों की इस दुविधा का क्या कारण है, आखिर फ्यूल पर यूं 'फुल' कन्फ्यूजन क्यों है?
आज भी भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारें पेट्रोल इंजन वाली हैं. इनकी कीमत अपेक्षाकृत कम होती है और मेंटनेंस भी आसान और किफायती माना जाता है. लेकिन पेट्रोल की बढ़ती कीमतें ग्राहकों को परेशान कर रही हैं. दूसरी ओर E20 और भविष्य में E30 जैसे इथेनॉल ब्लेंडिंग फ्यूल को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं. लोग यह समझ नहीं पा रहे कि आज खरीदी गई कार आने वाले सालों में नए फ्यूल मानकों के लिए कितनी तैयार होगी. ऑटो कंपनियां भरोसा दिला रही हैं, लेकिन ग्राहकों के मन में शंकाएं बनी हुई हैं.
हाल ही में सरकार ने देश में E85 फ्यूल को लॉन्च किया है. इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री ने ऐलान किया है कि, देश में E100 यानी शत प्रतिशत इथेनॉल फ्यूल को मंजूरी दे दी गई है. इसके लिए जरूरी फाइलों पर उन्होंने हस्ताक्षर कर दिया है. यानी आने वाले समय में E100 फ्यूल का भी रास्ता साफ हो गया है. केंद्रीय मंत्री ने अगले डेढ़ से दो महीनों में देश में कुछ नई फ्लेक्स-फ्यूल कारों के आने का भी जिक्र किया है. एक आम खरीदार इस उधेड़बुन में फंसा है कि, मोटी EMI के लिए वो तैयारी कर भी ले तो क्या उसकी कार को कितने सालों तक सही फ्यूल मिलता रहेगा.
सरकार का कहना है
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