WhatsApp पर सरकार की पकड़ आसान, टेलीग्राम पर क्यों नहीं?

💻 Teknoloji 📰 India 🕐 4 saat önce

टेलीग्राम पर सरकार की पकड़ बनाना इतना मुश्किल क्यों है? क्लाउड स्टोरेज, यूजरनेम और बड़े नेटवर्क जैसे फीचर्स इसे WhatsApp से अलग बनाते हैं. जानिए पूरा मामला!

भारत में सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक के लिए टेंपररी बैन कर दिया गया है. इस बैन के पीछे सबसे बड़ा कारण NEET UG परीक्षा का पेपर लीक रोकना बताया जा रहा है. वहीं दूसरे फेमस मैसेजिंग ऐप्स पर अभी कोई बैन नहीं लगाया गया है, जैसे कि WhatsApp. आखिर दोनों ऐप्स में ऐसा क्या अंतर है कि टेलीग्राम पर बैन लग गया और व्हाट्सऐप सेफ रह गया?

टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों ही बहुत ज्यादा फेमस ऐप्स हैं और अपने मैसेजिंग फीचर्स के लिए जाने जाते हैं. लेकिन दोनों ऐप्स को अलग तरीके से बनाया गया है. WhatsApp एक पुराना मैसेजिंग सिस्टम की तरह काम करता है, जबकि टेलीग्राम एक बड़े क्लाउड-बेस्ड नेटवर्क की तरह काम करता है.

टेलीग्राम ऐप पर डेटा ऑनलाइन क्लाउड स्टोरेज में सेव रहता है. इसकी वजह से अगर आप किसी भी मोबाइल या डिवाइस में लॉगिन करते हैं तो अपनी सभी चैट्स और फाइल्स देख सकते हैं. अगर आपका फोन चोरी भी हो जाए, तब भी आपका डेटा क्लाउड पर सेफ रहता है. इसी फीचर की वजह से कोई भी व्यक्ति किसी भी डिवाइस से जानकारी आसानी से शेयर कर सकता है.

वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सऐप आपके फोन की स्टोरेज का ज्यादा इस्तेमाल करता है. डाउनलोड या शेयर किया गया डेटा फोन में सेव हो जाता है. ऐसे में अगर कोई जानकारी शेयर की जाती है, तो उसके निशान फोन में मौजूद रह सकते हैं. यहां क्लाउड बैकअप ऑप्शनल है.

टेलीग्राम में यूजरनेम का फीचर मिलता है, जिसकी मदद से लोग बिना फोन नंबर शेयर किए एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं और ग्रुप्स जॉइन कर सकते हैं. इस वजह से यूजर्स का फोन नंबर सामने नहीं आता.

वहीं व्हाट्सऐप पर किसी से बात करने या ग्रुप जॉइन करने के लिए फोन नंबर जरूरी होता है. इसी वजह से ग्रुप्स में लोग एक दूसरे के नंबर आसानी से देख सकते हैं.

टेलीग्राम पर चैनल्स का फीचर मिलता है, जो पब्लिक या प्राइवेट हो सकते हैं. चैनल का एडमिन एक क्लिक में अनलिमिटेड लोगों तक मैसेज, वीडियो और फाइल्स पहुंचा सकता है. इस वजह से जानकारी बहुत तेजी से फैल सकती है.

वहीं व्हाट्सऐप को प्राइवेट बातचीत और छोटे ग्रुप्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसके ब्रॉडकास्ट और ग्रुप फीचर्स में भी सीमाएं हैं, जिससे एक साथ बहुत ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचाना आसान नहीं होता.

व्हाट्सऐप, मेटा कंपनी के अंडर आता है, जिसके ऑफिस और लीगल टीमें कई देशों में मौजूद हैं. वहीं टेलीग्राम किसी भी देश में लोकल ऑफिस खोलने से बचता है और अपनी कंपनी को काफी हद तक डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से चलाता है.

लोकल ऑफिस और लीगल टीम न होने की वजह से सरकारों के लिए टेलीग्राम पर दबाव बनाना मुश्किल हो सकता है.

व्हाट्सऐप एक अच्छा टूल है, जिसकी मदद से लोग रोजाना अपने दोस्तों और परिवार वालों से फोन नंबर के जरिए बात करते हैं. लेकिन टेलीग्राम को ज्यादा प्राइवेसी, बड़े ऑडियंस तक जानकारी पहुंचाने और एडवांस फीचर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यही वजह है कि टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है.

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