एनटीए ने नीट-यूजी परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को दिया ये संदेश
दरअसल, इससे पहले एनटीए ने 3 मई को नीट-यूजी 2026 की परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन पेपर लीक की चर्चाओं के बीच परीक्षा रद्द कर दी गई थी.
लेबनान में इसराइली सेना अब जो कदम उठाएगी, वह ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते और अमेरिका-इसराइल गठबंधन दोनों की परीक्षा ले सकता है.
युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है.
उनकी यह चुप्पी ऐसे समय में है, जब इसराइल के अलग-अलग राजनीतिक समूह ये मांग तेज कर रहे हैं कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात को न मानें और लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखें.
संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत और नेतन्याहू के करीबी सहयोगी डैनी डेनॉन ने इस युद्धविराम समझौते को इसराइल के लिए बहुत खराब बताया है.
यह समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों को लेबनान में दुश्मनी समाप्त करने और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध करता है.
फिलहाल इसराइली सेना लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा किए हुए है.
विपक्षी दल ब्लू एंड व्हाइट के सांसद माइकल बिटन ने कहा, "किसी के युद्धविराम की याद दिलाने से पहले, हमें हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को नष्ट करना होगा. हमें अपनी सुरक्षा करनी है. वो अब भी हम पर हमले करते हैं. वो अब भी हम पर हमला करने की क्षमता विकसित कर रहे हैं. यह ऐसी स्थिति है जिसके साथ हम शांति से नहीं रह सकते."
बिन्यामिन नेतन्याहू ने अपने राजनीतिक भविष्य को ईरान के साथ हुए युद्ध से जोड़ दिया है और अब भी यह दावा कर रहे हैं कि यह अभियान सफल रहा है. हालांकि उनके आलोचक उन तमाम पहलुओं की ओर इशारा कर रहे हैं जिनसे उनके अनुसार इस संघर्ष के बाद ईरान और अधिक मज़बूत होकर उभरा है.
युद्धविराम समझौते में लेबनान को शामिल किया जाना भी तेहरान के बढ़ते प्रभाव का एक और संकेत माना जा रहा है.
वहीं, अपने सहयोगी अमेरिकी के साथ मौजूदा मतभेद नेतन्याहू की विश्वसनीयता को लगा एक और झटका माना जा रहा है.
📌 Kaynak
Bu haber XML kaynağından derlenmiştir. Tamamı için orijinal habere gidin.
Orijinal haberi oku →