दलगत सीमाओं को लांघकर सीएम योगी ने पेश की राजनीति की नई मिसाल

📌 Diğer 📰 India 🕐 2 saat önce

जब कोई शासक दलगत सीमाओं को लांघकर मर्यादा की लक्ष्मण रेखा की रक्षा के लिए खड़ा होता है, तो वह एक सामान्य राजनेता से ऊपर उठकर 'राजधर्म' का प्रतीक बन जाता है.

राजनीति में प्रतिद्वंद्विता का अपना व्याकरण होता है और कोई भी राजनेता अपने विरोधी पर आक्रमण से नहीं चूकता. ऐसा स्वाभाविक भी है क्योंकि हर दल की अपनी विचारधारा होती है, चुनावी रणनीतियां होती हैं और इसी के आधार पर जनता उनका आंकलन करती है, लेकिन, जब कोई शासक दलगत सीमाओं को लांघकर समाज के समग्र हित में खड़ा होता है, तो वह राजनीति में विशिष्ट दिखाई देने लगता है. वह राजधर्म का पालन करने वाले शासक के रूप में दिखाई देने लगता है.

ऐसे समय में जब राजनीतिक संस्कृति का क्षरण होने लगा है, जहां विरोधी दल के नेता को शत्रु मानकर बयानबाजियां की जाने लगी हैं, यहां तक कि परिवार तक को निशाने पर लिया जाने लगा है, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधर्म का पालन करते हुए राजनीति का आदर्श पेश करते हुए एक सामान्य राजनेता से ऊपर दिखाई देते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी को लेकर जब कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री फैलाई तो सीएम योगी ने न सिर्फ इसे गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया, बल्कि आजमगढ़ में सभा के दौरान ऐसे लोगों को स्पष्ट संदेश भी दिया- ‘बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं है, बेटी तो बेटी है. हम उन संस्कारों में पले-बढ़े हैं, जहां गांव की बेटी सबकी बेटी होती है, बहन पूरे गांव की होती है.’ ऐसे संकल्प मुख्यमंत्री के सांस्कारित सामाजिक बोध को दर्शाते हैं.

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राजनीति में प्रतिद्वंद्विता की परिभाषा में विरोधी को कमजोर करना, उसके आधार पर क्षेत्रों की उपेक्षा करना और उसके अतीत से गड़े मुर्दे उखाड़कर वार करना आदि तरीके शामिल हैं. सोशल मीडिया में यह तरीके और भी आक्रामक हो जाते हैं, जिसमें अब नेताओं के परिवार को शामिल करने की विकृति भी दिखाई देने लगी है. यह राजनीतिक संस्कृति का वह क्षरण है जिस पर समाज के हर सचेत व्यक्ति को चिंता होनी चाहिए. ऐसे में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी को लेकर की गई टिप्पणी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कदम उठाया, वह राजनीतिक आचार-व्यवहार का आदर्श है, जिसमें यह संदेश निहित है कि सत्ता का उपयोग केवल अपने दल के हितों की रक्षा के लिए न होकर समता का होना चाहिए.

लोकतंत्र में मतभेद संभव है, विवाद संभव है, तीखी बहसें भी स्वीकार्य हैं, लेकिन व्यक्तिगत गरिमा का हनन नहीं होना चाहिए और मन भेद भी नहीं होना चाहिए. योगी सरकार में यह वैचारिक परिपक्वता गहरी और व्यापक नजर आती है. उत्तर प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों की ही बात करें, तो प्रदेश की राजनीति में एक अलिखित और पक्षपातपूर्ण नियम दशकों से चला आ रहा था, विकास वहीं जहां सत्ता के विधायक हों.

इस व्यवस्था का कोई आदेश नहीं जारी होता था, लेकिन नेता, अधिकारी और यहां तक कि जनता भी जानती थी. सत्ता के इस सौतेलेपन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा. आजमगढ़ का ही उदाहरण लें, जहां आतंकवाद की जड़ें थीं,

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