दीवारों पर लाल क्रॉस और नोटिस... लखनऊ में 7 दिन बाद चल सकता है बुलडोजर
सुबह लोग रोज की तरह अपने काम में लगे थे. बच्चों के स्कूल जाने की तैयारी चल रही थी, महिलाएं घर के काम में व्यस्त थीं. तभी कुछ अधिकारी पहुंचे, घरों की दीवारों पर लाल रंग से बड़े-बड़े क्रॉस बनाए गए और नोटिस चिपका दिए गए. नोटिस में लिखा था- 7 दिन के भीतर मकान खाली कर दें. कुछ देर बाद बुलडोजर भी पहुंच गया. देखते ही देखते पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.
राजधानी लखनऊ में 1090 चौराहे के पास सिंचाई विभाग की जमीन पर बने कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की है. प्रशासन का दावा है कि यह जमीन सिंचाई विभाग की है और उस पर अवैध कब्जा कर मकान बनाए गए हैं. कार्रवाई के दौरान कई घरों पर लाल रंग से क्रॉस का निशान लगाया गया. साथ ही मकान मालिकों को सात दिन के भीतर घर खाली करने का नोटिस भी दिया गया. एक मकान पर बुलडोजर कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी सामने आई है.
अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके के लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों देखने को मिली. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और उन्हें पहले किसी तरह की स्पष्ट सूचना या नोटिस नहीं दिया गया. लोगों का आरोप है कि प्रशासन अचानक पहुंचा, एक मकान तोड़ दिया और बाकी घरों को खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया. कई परिवारों का कहना है कि अगर मकान टूटे तो उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा.
कार्रवाई के दौरान कई महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि उनके परिवारों के पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है. महिलाओं का कहना है कि उन्होंने वर्षों की कमाई लगाकर अपने घर बनाए हैं और अब अचानक बेघर होने का डर सता रहा है.
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प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान का हिस्सा है. अधिकारियों के मुताबिक, सिंचाई विभाग की भूमि पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है. हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए.
फिलहाल जिन घरों पर लाल क्रॉस लगाए गए हैं, वहां रहने वाले परिवार अगले सात दिनों को लेकर बेहद चिंतित हैं. एक तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का अभियान बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग अपने आशियाने बचाने की गुहार लगा रहे हैं.
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