रणजी से टीम इंडिया तक... गुरनूर ने बताया कैसे हुई इंटरनेशल की तैयारी

📌 Diğer 📰 India 🕐 3 saat önce

अफगानिस्तान के खिलाफ शुरुआती दो वनडे में 6 विकेट लेकर सुर्खियों में आए तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपनी सफलता का श्रेय घरेलू क्रिकेट को दिया है.

अफगानिस्तान के बल्लेबाज जब गुरनूर बरार की तेज रफ्तार और उछाल भरी गेंदों से जूझ रहे थे, तब शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि सामने खड़ा यह युवा तेज गेंदबाज खुद को इस मंच के लिए वर्षों से तैयार कर रहा है. पंजाब के 26 साल तेज गेंदबाज का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी सहज शुरुआत किसी चमत्कार का नतीजा नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट की लंबी और कठिन यात्रा का परिणाम है.

2 वनडे में 6 विकेट लेकर चर्चा में आए बरार कहते हैं कि टीम इंडिया की जर्सी पहनने के बाद भी उन्होंने अपने खेल में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया. वही सोच, वही लेंथ और वही आक्रामकता, जिसने उन्हें रणजी ट्रॉफी और भारत ए तक पहुंचाया, अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनकी ताकत बन रही है.

बरार ने कहा, 'मेरे लिए यह रणजी में गेंदबाजी करने जैसा ही था. मैं हमेशा तेज गेंदबाजी करने, सही लेंथ पर गेंद डालने और स्विंग हासिल करने पर ध्यान देता हूं. इंडिया ए में भी यही किया और यहां भी उसी योजना पर अमल किया.'

दरअसल, बरार की कहानी भारतीय क्रिकेट के उस रास्ते की कहानी है, जहां टीम इंडिया तक पहुंचने से पहले खिलाड़ी को कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है. रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन, फिर भारत ए, दलीप ट्रॉफी और ईरानी कप जैसे मंच. बरार मानते हैं कि यही सीढ़ियां उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार करती गईं.

उन्होंने कहा, 'इंडिया ए में चयन मेरे लिए बहुत बड़ा पल था. जब आपको वहां मौका मिलता है तो लगता है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं. उस अनुभव ने मुझे काफी आत्मविश्वास दिया.'

6 फीट 5 इंच लंबे बरार की सबसे बड़ी पहचान उनकी अतिरिक्त उछाल है. लेकिन वह मानते हैं कि केवल कद या गति से सफलता नहीं मिलती. असली फर्क आत्मविश्वास पैदा करता है.

बरार ने कहा, 'मैं अपनी हर गेंद पर भरोसा करता हूं. मुझे लगता है कि मैं और बेहतर कर सकता था. अभी यह सिर्फ शुरुआत है और मैं आने वाले मैचों में खुद को और बेहतर साबित करना चाहता हूं.'

बरार के विकास की कहानी में आईपीएल का अध्याय भी अहम है. गुजरात टाइटन्स के ड्रेसिंग रूम में बिताया गया समय उनके लिए किसी क्रिकेट विश्वविद्यालय से कम नहीं रहा. वहां उन्हें आशीष नेहरा, कैगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और ईशांत शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनसे सीखने का मौका मिला.

उन्होंने कहा, 'हर खिलाड़ी खेलना चाहता है और मैं भी मौके का इंतजार कर रहा था. लेकिन उस दौरान मैंने काफी कुछ सीखा. बड़े खिलाड़ियों के साथ रहकर समझ आया कि इस स्तर पर सफल होने के लिए क्या चाहिए.'

अभी बरार का अंतरराष्ट्रीय सफर शुरू ही हुआ है, लेकिन उनकी बातों से साफ है कि वह रातोंरात मिली सफलता के बजाय प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं. शायद यही वजह है कि टीम इंडिया में कदम रखने के बाद भी वह खुद को किसी नए खिलाड़ी की तरह नहीं, बल्कि लंबे समय से तैयार हो रहे एक पेशेवर गेंदबाज की तरह महसूस करते हैं.

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