जम्मू-कश्मीर में ऐसा क्या हुआ जिसके बाद पुलिस और सेना के जवान आ गए आमने-सामने

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जम्मू-कश्मीर में ऐसा क्या हुआ जिसके बाद पुलिस और सेना के जवान आ गए आमने-सामने

दरअसल इसकी शुरुआत किश्तवाड़ ज़िले में तब हुई जब ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने पुलिस की मदद से सेना के एक अधिकारी की सरकारी टोयोटा हाईलेक्स एसयूवी ज़ब्त कर ली थी.

24 जून को जम्मू-कश्मीर में सेना और स्थानीय पुलिस के जवानों बीच एक कथित झड़प का मामला सामने आया है.

दरअसल ये मामला किश्तवाड़ ज़िले में सामने आया है जहां ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने पुलिस की मदद से सेना के एक अधिकारी की सरकारी टोयोटा हाईलेक्स एसयूवी ज़ब्त कर ली थी.

बुधवार को ही यह विवाद इतना बढ़ा कि सेना और स्थानीय पुलिस के बीच झड़प की स्थिति देखने को मिली और स्थानीय पुलिस ने सेना के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की.

वहीं दूसरी तरफ़ सेना ने बयान जारी करके कहा है कि इस मामले की जांच की जा रही है.

दरअसल सेना के एक अधिकारी की सरकारी एसयूवी, किश्तवाड़ के असिस्टेंट रीज़नल ट्रांसपोर्ट ऑफ़िसर तस्लीम वानी ने पुलिसकर्मियों की मदद से ज़ब्त की थी. इसके बाद गाड़ी को अठोली पुलिस स्टेशन ले जाया गया और यहीं कथित झड़प हुई.

एक सूत्र ने बताया कि 17 राष्ट्रीय राइफ़ल्स के मेजर विकास शर्मा, एक अन्य सैनिक और एक बच्चे के साथ एसयूवी में यात्रा कर रहे थे, तभी पाडर में उन्हें रोका गया.

सूत्र ने दावा किया है, "कार को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से ज़ब्त किया गया, जबकि उसके सभी काग़ज़ात मौजूद थे."

तस्लीम वानी कथित तौर पर अपनी कार्रवाई का कारण नहीं बता पाए. फ़ोन पर पूछे जाने पर वानी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता."

बीबीसी को पता चला है कि घटना के समय किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर पंकज कुमार शर्मा पाडर तहसील में एक आधिकारिक बैठक में शामिल होने जा रहे थे.

पंकज शर्मा का काफ़िला अठोली पुलिस स्टेशन के पास सड़क के एक संकरे और घुमावदार हिस्से पर रुक गया क्योंकि सामने से टोयोटा एसयूवी आ रही थी.

मुश्किल इलाके और भूस्खलन के खतरे वाले रास्तों के कारण किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी ज़िले में सड़कों की हालत अक्सर ख़राब रहती है, जिससे दोनों तरफ़ से गाड़ियों की आवाजाही में रुकावट आती है.

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एक चश्मदीद ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर के सुरक्षा दस्ते की पहली गाड़ी (पायलट कार) से एक पुलिस अधिकारी बाहर निकला और एसयूवी ड्राइवर से गाड़ी पीछे करने को कहा ताकि काफ़िला आगे बढ़ सके.

इस बात को लेकर पुलिस अधिकारी और आर्मी मेजर के बीच बहस हो गई. इसके बाद एआरटीओ वानी, एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (किश्तवाड़) और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (किश्तवाड़) भी मामले में शामिल हो गए; ये सभी डिप्टी कमिश्नर के साथ थे.

स्थानीय प्रशासन का आरोप है कि आर्मी अधिकारी ने एसयूवी के काग़ज़ात दिखाने से इनकार कर दिया और कहा कि वह "सिविल प्रशासन के आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं", जिससे मामला और बढ़ गया.

डोडा के विधायक मेहराज मलिक ने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया, "किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर ने पुलिस का इस्तेमाल करके भारतीय सेना के जवानों पर हथियार तान दिए, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनका काफिला 10 मिनट देर से पहुंचा था."

"फिर भी ये अफ़सर उम्मीद करते हैं कि जब वे रोज़ाना जनता को परेशान करें, तो जनता ग़ुस्सा भी न करे. अब उन पर पीएसए कौन लगाएगा? बीजेपी च

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