अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला: जून महीने की शुरुआत से आख़िर तक क्या-क्या हुआ?

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला: जून महीने की शुरुआत से आख़िर तक क्या-क्या हुआ?

अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित धांधली के मामले ने मौसमी गर्मी के साथ-साथ सियासी पारा काफ़ी बढ़ा दिया था. जून के महीने की शुरुआत से लेकर आख़िर तक इसी मामले से जुड़ी ख़बरों ने सुर्ख़ियां बटोरीं.

अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी और गड़बड़ी के मामले में एसआईटी अब तक आठ अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर चुकी है.

इन आठों अभियुक्तों की तीन दिन की न्यायिक हिरासत ख़त्म होने के बाद सोमवार, 29 जून को दोबारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अभियुक्तों की पिछली न्यायिक हिरासत ख़त्म होने के बाद वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए भ्रष्टाचार विरोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के सामने पेश किया गया था.

इससे पहले आठों अभियुक्तों को एक विशेष मजिस्ट्रेट ने सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था.

वहीं सोमवार, 29 जून को ही फ़ैज़ाबाद बार एसोसिएशन ने आम सभा की बैठक में राम मंदिर मामले के अभियुक्तों की पैरवी नहीं करने का फ़ैसला किया था.

बार एसोसिएशन ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य इन अभियुक्तों की ओर से पैरवी करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी.

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित धांधली का मुद्दा जून के महीने में काफ़ी चर्चा में रहा. तपती गर्मी के जून महीने में इस मुद्दे ने सियासी पारा भी बढ़ाया जिस पर काफ़ी राजनीतिक बयानबाज़ियां भी होती रहीं.

कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जून की शुरुआत में राम मंदिर के दान पात्र की नक़दी और दूसरे क़ीमती सामान के ग़ायब होने की आशंकाएं जताई गई थीं.

जिसके बाद इस मुद्दे पर अयोध्या के स्थानीय नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था.

अयोध्या से सपा के पूर्व विधायक पवन पांडे ने भी चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाया जिसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कई मांगें कीं.

अखिलेश ने एक्स पर पोस्ट करके दावा किया कि 'राम मंदिर' के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है.

उन्होंने लिखा, "समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि 'राम मंदिर' के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है. ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है. कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है."

"न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है. सरकार की चुप्पी संदिग्ध है."

इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर चढ़ावे में किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया.

कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया कि इसी दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को चिट्ठी लिखकर इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग की.

इन्हीं रिपोर्टों में ये भी दावा किया गया कि पीएमओ ने ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी थी.

इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की घोषणा की.

एसआईटी

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