अकाल तख़्त क्या है और पंजाब के सिख विधायकों को क्यों होना पड़ा पेश?
पंजाब के सिख विधायक और मंत्री सोमवार को अकाल तख़्त के सामने पेश हुए. इसके बाद अकाल तख़्त एक बार फिर चर्चा में है.
बेअदबी विरोधी क़ानून को लेकर पंजाब के सिख विधायकों और मंत्रियों ने सोमवार को अकाल तख़्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज के सवालों के जवाब दिए.
अकाल तख़्त ने "जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026" जिसे बेअदबी विरोधी क़ानून भी कहा जाता है, उस पर अपनी आपत्तियों के संबंध में पंजाब के सभी सिख विधायकों को तलब किया था.
सुनवाई के बाद अकाल तख़्त ने पंजाब सरकार को "जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026" से जुड़ी आपत्तियों को दूर करने के लिए एक महीने का समय दिया है.
जत्थेदार गरगज ने कहा, "अकाल तख़्त साहिब क़ानून में मौजूद त्रुटियों की एक प्रति सरकार को सौंपेगा. आपत्तियों के दूर होने तक नए क़ानून को रोक दिया जाना चाहिए."
जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज के मुताबिक़, सभी विधायकों ने हाथ उठाकर इस पर अपनी सहमति जताई.
अकाल तख़्त ने इस क़ानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लिए इस्तेमाल की गई शब्दावली पर आपत्ति जताई है.
अकाल तख़्त ने 'बीर' की जगह 'सरूप' के प्रयोग के अलावा संरक्षक (कस्टोडियन) की परिभाषा को लेकर आपत्तियां उठाई हैं.
इस साल 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया था. इसका उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान (अपवित्रीकरण) के मामलों में अधिक कठोर सज़ा का प्रावधान करना है.
इसके तहत 2008 में शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान लागू किए गए 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम, 2008' में संशोधन किया गया. इसका उद्देश्य सिख धर्म के शाश्वत "जीवित" गुरु माने जाने वाले 'गुरु ग्रंथ साहिब' के प्रति उचित सम्मान और देखभाल सुनिश्चित करना था.
संशोधित अधिनियम के मुताबिक़, कोई भी व्यक्ति जो गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों (भौतिक प्रतियों) के अपमान का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास की ऐसी सज़ा दी जाएगी, जो सात वर्ष से कम नहीं होगी और जिसे 20 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा उस शख़्स पर दो से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
साथ ही, कोई भी व्यक्ति जो आपराधिक साज़िश के तहत शांति या सांप्रदायिक सौहार्द को बाधित करने के इरादे से गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान का अपराध करता है, उसे कम से कम 10 साल की सज़ा होगी. इस सज़ा को आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही, उस पर पांच से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में सिख अध्ययन विभाग के निदेशक डॉ. अमरजीत सिंह कहते हैं, "जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 में इस्तेमाल की गई शब्दावली उचित नहीं है. मैंने क़ानून पारित करने से पहले विधानसभा की गठित की गई समिति को इस शब्दावली का सुझाव दिया था."
"इस क़ानून में इस्तेमाल किया गया 'संरक्षक' (कस्टोडियन) शब्द बिल्कुल सही नहीं है. शब्दावली सटीक होनी चाहिए. इस प
📌 Kaynak
Bu haber XML kaynağından derlenmiştir. Tamamı için orijinal habere gidin.
Orijinal haberi oku →