पाकिस्तान बोला- 'भारत से टकराव नहीं चाहते, पर पानी रोकना होगा युद्ध जैसी कार्रवाई'
इस्लामाबाद में मंगलवार को सिंधु जल संधि पर एक इंटरनेशनल सेमिनार को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि को एकतरफ़ा सस्पेंड करना “सही नहीं है और इंटरनेशनल लॉ में इसका कोई आधार नहीं है.”
पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि वह भारत के साथ किसी 'टकराव' या 'विवाद' की स्थिति नहीं चाहता, लेकिन सिंधु जल संधि के तहत देश के जल संसाधनों को रोकने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' माना जाएगा.
मंगलवार को सिंधु जल संधि पर इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि को 'एकतरफ़ा तरीके़ से निलंबित करने का कोई आधार नहीं है और न ही अंतरराष्ट्रीय क़ानून में इसकी कोई गुंजाइश है.'
भारत ने इसहाक डार के ताज़ा बयान पर फ़िलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाते हुए जवाबी क़दम के तौर पर सिंधु जल संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित कर दिया था.
पाकिस्तान ने भारत के इस क़दम को ख़ारिज कर दिया था और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का रुख़ किया था.
नीदरलैंड्स के शहर द हेग में स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन यानी मध्यस्थता अदालत ने स्पष्ट किया था कि भारत इस संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित नहीं कर सकता.
लेकिन भारत ने इस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था और सिंधु जल संधि के निलंबन को जारी रखने की घोषणा की थी.
पहलगाम हमले और भारत की ओर से सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने कहा था कि भारत की ओर से पाकिस्तान का पानी रोकने या उसका रुख़ बदलने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' माना जाएगा.
पाँच जून को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा था कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान 'सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं कर देता.'
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक़ डार ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान अब भी उसी रुख़ पर कायम है और वह 'यह सुनिश्चित करेगा कि उसके अधिकारों का हनन न हो.'
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने हमेशा मतभेदों के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और दोनों पक्षों के सहमत तंत्र का रास्ता अपनाने की बात की है. हालांकि इस मामले में किसी तरह की कोई ग़लतफ़हमी नहीं होनी चाहिए कि सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को मिले जल अधिकारों से वंचित करने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गहरे और दूरगामी असर डालेगी."
मंगलवार को हुए इस सेमिनार में पाकिस्तानी सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया था.
इस मौके पर पाकिस्तान में इंडस वाटर कमिश्नर सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने कहा कि पिछले साल अप्रैल के बाद से वो चिनाब नदी के प्रवाह में बदलाव के मामले पर अपने भारतीय समकक्ष को चार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.
उन्होंने आगे कहा कि चिनाब नदी में पानी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव कोई 'तकनीकी समस्या' नहीं बल्कि 'रणनीतिक ख़तरा' है.
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