राजेश एक्सपोर्ट्स: 15 लाख करोड़ रुपए की 'फ़र्जी कमाई' दिखाने वाली कंपनी में एलआईसी के भारी निवेश पर उठे सवाल

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राजेश एक्सपोर्ट्स: 15 लाख करोड़ रुपए की 'फ़र्जी कमाई' दिखाने वाली कंपनी में एलआईसी के भारी निवेश पर उठे सवाल

राजेश एक्सपोर्ट्स पर अपने रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है. म्यूचुअल फंड्स ने इस कंपनी से दूरी बनाए रखी लेकिन एलआईसी की ओर से इसमें निवेश बढ़ाने पर सवाल उठ रहे हैं.

शेयर बाज़ार पर निगरानी रखने वाली रेग्युलेटरी संस्था सेक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) की जांच के दायरे में आई राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कथित तौर पर 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है.

हालाँकि कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फ़ाइलिंग में सेबी के इन आरोपों से इनकार किया है.

कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि उसने रेवेन्यू (राजस्व) से संबंधित सही आंकड़े जारी किए हैं और किसी तरह का कोई ग़लत काम नहीं किया है.

दरअसल, 4 जून को जारी अपने 109 पन्नों के आदेश में सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अपनी विदेशी सब्सिडियरीज (सहयोगी कंपनी) के ज़रिये कई साल तक अपने कामकाज को बढ़ा-चढ़ाकर बताया.

सेबी के मुताबिक़ पिछले पांच वित्त वर्ष ( 2020-21 से 2024-25) के दौरान इस कंपनी के खातों में भारी हेरफेर की गई.

इससे रेवेन्यू में कथित तौर पर लगभग 158.3 अरब डॉलर (क़रीब 15 लाख 16 हजार करोड़ रुपये) की हेराफेरी की गई.

यह रक़म पिछले पांच वित्त वर्ष में कंपनी की ओर से दिखाए गए कुल रेवेन्यू का लगभग 99.8 फ़ीसदी है.

इमेज स्रोत, Timon Schneider/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

राजेश एक्सपो ज्वैलरी और गोल्ड रिफ़ाइनिंग के कारोबार में है और क़रीब तीन दशक पहले 1995 में शेयर बाज़ार में लिस्ट हुई थी.

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध शेयरहोल्डिंग पैटर्न बताता है कि राजेश एक्सपोर्ट्स में निवेश को लेकर घरेलू संस्थागत निवेशकों, जिन्हें आमतौर पर म्यूचुअल फंड्स कहा जाता है, ने पिछले 10 साल में कंपनी के शेयर में ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई.

म्यूचुअल फंड्स की शेयर हिस्सेदारी इस दौरान लगभग नहीं के बराबर रही.

मार्च 2017 में राजेश एक्सपोर्ट्स में म्यूचुअल फंड्स का हिस्सा 0.46 प्रतिशत था और समय के साथ-साथ ये हिस्सेदारी मामूली उतार-चढ़ाव के साथ तक़रीबन इतनी ही (स्थिर) बनी रही.

मार्च 2026 का कंपनी का डेटा दिखाता है कि सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी की कंपनी के शेयरों में हिस्सेदारी 10.80 फ़ीसदी थी.

शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर नज़र डालने से ये भी पता चलता है कि कंपनी में एलआईसी ही इकलौता बड़ा घरेलू संस्थागत निवेशक रही.

मार्च 2017 में एलआईसी की हिस्सेदारी 1.19 फ़ीसदी थी, जो तक़रीबन 10 सालों में बढ़कर 10.80 फ़ीसदी तक पहुंच गई.

दिलचस्प ये है कि गोल्ड और ज्वैलरी क़ारोबार से जुड़ी इस कंपनी में बीमा क्षेत्र की किसी और कंपनी ने कोई रुचि नहीं दिखाई.

मार्च 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक़ दूसरी इंश्योरेंस कंपनियों की इसमें ना के बराबार हिस्सेदारी थी.

इस मामले में सियासत भी होने लगी है. विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मोदी सरकार को निशाना बनाया है.

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत्र ने इसे एक घोटाला करार दिया है.

उन्होंने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में लिखा, "पांच सालों में कंपनी ने 15.5 लाख करोड़ का फ़र्ज़ी रेवेन्यू दिखाया.. इसने स

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