ममता बनर्जी से मुसलमान विधायक भी दूरी क्यों बना रहे हैं?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में स्पीकर को पत्र लिखने वाले 58 विधायकों में कम से कम 17 मुस्लिम विधायक शामिल थे.
पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर कम से कम 31 मुस्लिम विधायक चुने गए थे, जो पार्टी के 80 विधायकों का लगभग 40 प्रतिशत हैं.
सालों तक ममता बनर्जी को मुस्लिम समुदाय का मज़बूत समर्थन मिलता रहा है और इस बात से बहुत कम लोग असहमत होंगे कि उनकी पिछली चुनावी सफलताओं में मुस्लिम वोटों की बड़ी भूमिका रही है.
हालाँकि, तृणमूल विधायक दल में उभरे बड़े विभाजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब इन मुस्लिम विधायकों में से कई ममता बनर्जी के साथ खड़े नहीं हैं.
विधायक दल के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में स्पीकर को पत्र लिखने वाले 58 विधायकों में कम से कम 17 प्रमुख मुस्लिम विधायक शामिल हैं.
इसे ऐसे कह सकते हैं कि पार्टी के आधे से अधिक मुस्लिम विधायक अब ममता बनर्जी से अलग खेमे में दिखाई दे रहे हैं.
इनमें सबसे प्रमुख नाम कसबा के विधायक और प्रभावशाली तृणमूल नेता जावेद अहमद ख़ान का है, जिन्हें लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे क़रीबी सहयोगियों में गिना जाता था.
तृणमूल कांग्रेस का कोलकाता स्थित मुख्यालय 'तृणमूल भवन' जावेद अहमद ख़ान की ओर से उपलब्ध कराई गई ज़मीन पर ही बना था.
भवानीपुर में भी ममता काफ़ी हद तक उनके समर्थन पर निर्भर रहीं थीं.
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
लेकिन अब जावेद अहमद ख़ान ने सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी से दूरी बना ली है और पार्टी में 'आंतरिक लोकतंत्र की कमी' का आरोप लगाया है.
ऋतब्रत बनर्जी के साथ खड़े होकर उन्होंने यहाँ तक कहा, "देखते हैं आने वाले दिनों में ममता बनर्जी के साथ कितने लोग रहते हैं."
बुधवार को विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में पत्र देने वाले अन्य मुस्लिम विधायकों में रघुनाथगंज के अख़रुज्जमान ख़ान शामिल हैं, जिन्हें मुख्य सचेतक (चीफ़ व्हिप) नियुक्त किया गया है.
उनके अलावा सूती के इमानी बिस्वास, हरिहरपाड़ा के नियामत शेख़, चोपड़ा के हामिदुल रहमान और पूर्व मंत्री ग़ुलाम रब्बानी शामिल हैं.
ममता बनर्जी के साथ बने रहने वाले मुस्लिम विधायकों की संख्या अब केवल 13 या 14 बताई जा रही है.
इनमें मालतीपुर के अब्दुर रहीम बॉक्सी, इटाहार के मुशर्रफ़ हुसैन और हरिश्चंद्रपुर के मतिउर रहमान शामिल हैं.
हालाँकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अगर ममता बनर्जी का पार्टी संगठन पर नियंत्रण कमज़ोर पड़ता है तो इनमें से भी कितने विधायक ममता के प्रति वफ़ादार बने रहेंगे.
बताया जाता है कि ऋतब्रत गुट इन नेताओं के साथ भी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं.
हालिया चुनावी नतीजे संकेत देते हैं कि ममता बनर्जी के पारंपरिक मुस्लिम समर्थन आधार में दरारें उभरने लगी हैं.
साथ ही, कई मुस्लिम बहुल ज़िलों में बीजेपी के पक्ष में हिंदू वोटों के एकजुट होने के संकेत भी मिले हैं.
बदलते राजनीतिक परिदृश्य में कई मुस्लिम नेता अपने प्रभाव और निर्वाचन क्षेत्रों को बचाने के लिए धार्मिक वोट बैंक की राजनीति से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से "विजेता ही सब कुछ" वाली संस्कृति से प्रभावित र
📌 Kaynak
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