दिल्ली आग हादसाः पिता और बेटे ने समझदारी से बचाई कई लोगों की जान
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में बचाव कार्य के दौरान की एक वीडियो फुटेज ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें रोड पर बिछे गद्दों पर कूदकर करीब 12 से 15 लोगों ने अपनी जान बचाई.
दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में बुधवार को लगी भीषण आग ने 21 लोगों की ज़िंदगियां लील लीं, जिसमें 11 विदेशी नागरिक थे. इनमें अधिकांश अपने रिश्तेदारों के इलाज़ के लिए यहां ठहरे हुए थे.
इस घटना के दौरान एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें रोड पर बिछे गद्दों पर कूदकर करीब 12 से 15 लोगों ने अपनी जान बचाई. यह सूझबूझ का काम होटल के ठीक सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाज़ुद्दीन और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने किया था.
उन्होंने न केवल घायलों को बाहर निकालने में मदद की, बल्कि कई लोगों को अस्पताल भिजवाने के लिए चादरें और ज़रूरी कपड़े दिए. हालांकि इस बचाव कार्य में उनकी दुकान का काफ़ी सामान नष्ट हो गया. और उनके इस नुकसान की भरपाई के लिए फिलहाल प्रशासन से कोई आगे नहीं आया है.
इसके बावजूद वे इस बात से संतुष्ट हैं कि उन्होंने लोगों की जान बचाने में योगदान दिया. साथ ही, उन्होंने बताया कि अगर होटल का दूसरा निकास द्वार खुला होता, तो और अधिक लोगों को बचाया जा सकता था.
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अरमान मंसूरी की रजाई-गद्दे की दुकान हौजरानी मार्केट में है. वह बताते हैं कि सुबह सवा आठ बजे के आसपास का टाइम था, जब किसी ने बताया कि मेरी दुकान के सामने आग लग गई है.
वह कहते हैं कि साढ़े आठ बजे वे वहां पहुंच गए और देखा कि सामने के होटल के ग्राउंड फ्लोर पर चारों तरफ आग फैली हुई थी और अफरा-तफरी का माहौल था. पर तब आग ऊपर की मंज़िलों तक नहीं फैली थी. इस बीच अचानक होटल से एक व्यक्ति दौड़कर बाहर निकला, फिर उसने बाहर से ही होटल के शीशे तोड़े लेकिन वो दोबारा अंदर नहीं जा सका क्योंकि आग बहुत भड़क गई थी.
सुबह का वक्त होने से होटल में मौजूद सभी गेस्ट लगभग सो रहे थे, कुछ स्टाफ ही वहां मौजूद था.
वह बताते हैं कि आग इतनी ज़्यादा फैल गई कि फिर न कोई बाहर निकल सकता था और न कोई अंदर बचाने जा सकता था.
जैसे ही पहली और दूसरी मंजिल तक धुआं फैला, वहां मौजूद लोग हेल्प..हेल्प कहते हुए चिल्लाने लगे.
अरमान मंसूरी बताते हैं, "इस दौरान मैंने अपनी दुकान से मोटे-मोटे गद्दे निकालकर साथ वालों की मदद से सड़क पर बिछाने शुरू किए. फिर कई बंदे पहली और दूसरी मंजिल से जान बचाने को नीचे कूदे. गद्दों पर कूदने से उनकी जान बच गई, भले थोड़ी बहुत चोट आई हो."
उनके पिता रियाज़ुद्दीन मंसूरी का कहना है, "जब हमने देखा कि लोग नहीं बच पाएंगे तो हमने अपने गद्दे बिछा दिए. एक बार में उस पर सात से आठ लोग कूदे, और फिर उनकी संख्या बढ़कर 12 से 15 हो गई. इनमें से किसी की मौत नहीं हुई है."
अरमान बताते हैं, "इसके आधे घंटे के बाद फायर ब्रिगेड आई और उसने आग को बुझाया. फिर फायर ब्रिगेड के साथ करीब दस लोग अंदर गए जिसमें मैं भी था. मगर धुआं बहुत होने से मैं ज़्यादा अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर सका. सिर्फ़ ग्राउंड फ्लोर पर गया. लेकिन वहां भी सांस लेना मुश्किल था. वहां मैंने चारों तरफ कैजुएलिटी देखीं, कई लोग बेहोश पड़े थे."
वह होटल से बाहर निकाले गए लोगों के बारे में बताते हुए कहते हैं, "हम
📌 Kaynak
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