'सरकार ने नीट ठीक से कराई होती तो मेरी बेटी ज़िंदा होती', नागपुर की स्टूडेंट ने की आत्महत्या, पुलिस ने क्या बताया?
स्नेहा के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या से पहले एक नोट लिखा था, जिसमें नीट पेपर के रद्द होने से तनाव का ज़िक्र था.
"सरकार ने अपने कर्मचारियों की उपेक्षा की. अगर सरकार ने ध्यान दिया होता, तो नीट का पेपर लीक नहीं होता और मेरी बेटी बच जाती."
ये शब्द 18 साल की स्नेहा चतुर्वेदी के पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी के हैं, जिन्होंने बीबीसी न्यूज़ मराठी से बात की.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
स्नेहा ने 20 मई, 2026 को नागपुर स्थित अपने घर पर आत्महत्या कर ली.
वह 3 मई, 2026 को हुई नीट परीक्षा में शामिल हुई थीं. बाद में पेपर लीक के आरोपों के बाद यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी.
स्नेहा के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या से पहले एक नोट लिखा था, जिसमें नीट पेपर के रद्द होने से तनाव का ज़िक्र था.
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्नेहा चतुर्वेदी की आत्महत्या के संबंध में एक्स पर एक पोस्ट किया है.
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में स्नेहा चतुर्वेदी को 'आकांक्षा' कहकर संबोधित किया. उन्होंने कहा, "आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि मोदी जी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है."
स्नेहा के पिता के बयान के बाद नागपुर के अंबाज़ारी पुलिस स्टेशन में उनकी आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया है.
हालांकि, नागपुर के ज़ोन-2 के पुलिस उपायुक्त नित्यानंद झा का कहना है कि "स्नेहा की आत्महत्या से पहले कोई सुसाइड नोट नहीं मिला."
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
स्नेहा चतुर्वेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के मऊगंज ज़िले की रहने वाली हैं. उनके पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण 20 साल पहले नागपुर आकर अपना गुज़ारा चलाने लगे थे.
वह नागपुर के अंबाज़ारी हिल टॉप इलाक़े के अजय नगर क्षेत्र में एक किराए के मकान में रहते हैं.
कृष्णकुमार पहले शेफ़ के रूप में काम करते थे, लेकिन दो बार दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने वह नौकरी भी छोड़ दी.
उन्होंने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था. ख़राब स्वास्थ्य के बावजूद, उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए कड़ी मेहनत की.
उन्होंने अपनी बेटी को प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में नीट परीक्षा की तैयारी के लिए भेजा.
स्नेहा की आत्महत्या के बारे में बीबीसी न्यूज़ मराठी से बात करते हुए, उनके पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी फूट-फूटकर रो पड़ते हैं.
कृष्णकुमार कहते हैं, "पहली बार जब नीट परीक्षा हुई और उसने बहुत अच्छा किया. बेटी कह रही थी कि उसे अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल जाएगा. लेकिन जब नीट परीक्षा घोटाला सामने आया और उसे पता चला कि उसे दोबारा परीक्षा देनी होगी, तो उसके चेहरे से मुस्कान गायब हो गई. वह ठीक से खाना भी नहीं खाती थी. वह किसी से खुलकर बात भी नहीं करती थी."
वह कहते हैं, "मैंने उसे डॉक्टर बनाने के लिए बहुत मेहनत की. चाहे मुझे कितनी भी मेहनत करनी पड़े, मैंने अपने दिल में ठान लिया था कि मैं अपनी ब
📌 Kaynak
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