गरिंचा यानी फ़ुटबॉल का वो सुपरस्टार जिसने शराब में डूबने से पहले पेले की चमक फीकी कर दी थी
अब बात उस फ़ुटबॉलर की जो ड्रिब्लिंग की दुनिया का बेताज बादशाह था. ऐसा फ़ुटबॉलर जो फ़ुटबॉल के जादूगर माने जाने वाले पेले के सामने सुपर स्टार था.
फ़ुटबॉल की दुनिया को जानने वाले कहते हैं कि ख़ूबसूरत फ़ुटबॉल की पहचान ड्रिब्लिंग है. ड्रिब्लिंग यानी खिलाड़ी और गेंद के बीच ऐसा तालमेल कि सामने वाला खिलाड़ी देखते रह जाए और पलक झपकते ही गेंद गोलपोस्ट की ओर बढ़ जाए. इसे फ़ुटबॉल की सबसे कठिन कलाओं में से एक माना जाता है.
आधुनिक फ़ुटबॉल में यही वजह है कि लियोनेल मेसी का जादू सालों से कायम है. मेसी के अलावा ब्राज़ील के सुपरस्टार रोनाल्डिन्हो और फ्रांस के दिग्गज जिनेदिन ज़िदान भी अपनी ड्रिब्लिंग के लिए याद किए जाते हैं. दुनिया आज भी उनके खेल की दीवानी है.
कुछ उम्रदराज़ फ़ुटबॉल प्रशंसकों से बात कीजिए, तो वे कहेंगे कि डिएगो माराडोना जैसा ड्रिब्लर सदियों में एक बार पैदा होता है. वहीं, उनसे पहले की पीढ़ी इंग्लैंड के जॉर्ज बेस्ट और नीदरलैंड्स के जोहान क्रूफ़ की ड्रिब्लिंग का ज़िक्र करती नज़र आएगी.
लेकिन अब बात उस फ़ुटबॉलर की, जिसे ड्रिब्लिंग का बेताज बादशाह कहा जाता है. एक ऐसा खिलाड़ी, जिसकी चमक फ़ुटबॉल के जादूगर माने जाने वाले पेले के दौर में भी अलग दिखाई देती थी.
ब्राज़ीलियाई फ़ुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले इस खिलाड़ी का नाम था गरिंचा. उनका जलवा ऐसा था कि पेले की मौजूदगी वाली टीम के बारे में भी अख़बारों में सुर्खियां छपती थीं— 'अगले गुरुवार को फिर दिखेगा गरिंचा का जलवा.'
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फ़ुटबॉल की दुनिया में लंबे समय तक उन्हें पेले से भी महान खिलाड़ी माना जाता रहा. इस फुटबॉलर का नाम था गरिंचा.
इस नाम को रखे जाने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. गरिंचा हमउम्र बच्चों की तुलना में बहुत छोटे और कमज़ोर थे और उनकी बहनों ने उनका नाम स्थानीय छोटे पक्षी गरिंचा के नाम पर रख दिया था.
गरिंचा और पेले की तुलना तो तब भी होती थी और आज भी होती है. लेकिन उस पर बात करने से पहले कहानी गरिंचा की जिसके बारे में डॉक्टरों की राय ये थी कि वह ठीक ठाक एथलीट भी नहीं हो सकते.
28 अक्तूबर, 1933 को ब्राज़ील के रियो डि जेनेरियो की झुग्गी झोपड़ी वाली बस्ती में जन्मे गरिंचा के पैरों में समस्या थी. उनका दायां पैर बाएं पैर की तुलना में छह सेंटीमीटर छोटा था और उनका बायां पैर अंदर की ओर मुड़ा हुआ भी था.
एक तरह से वे सीधे खड़े नहीं हो सकते थे, लेकिन गरिंचा ने ड्रिब्लिंग में अपनी इस खामी को ही ख़ासियत में तब्दील कर लिया. वे जब बेढंग से अंदाज़ में विपक्षी टीम के डिफेंडरों को छकाते थे तो स्टेडियम की जनता का हंसते-हंसते बुरा हाल हो जाता था.
इसी वजह से गरिंचा को फुटबॉल की दुनिया में पीपल्स जॉय के नाम से जाना जाता था. उन्हें फुटबॉल का चार्ली चैप्लिन जैसा दर्जा हासिल था.
शराबी पिता से गरिंचा को केवल शराब की लत ही मिली थी और 14 साल की उम्र से पेट पालने के लिए वे एक टेक्स्टाइल मिल में मजदूरी करने लगे थे. उन्हें एक आलसी कर्मचारी के तौर पर देखा जाता था, लेकिन वे मिल की फुटबॉल टीम के स्टार थे. इसी वजह से नौकरी नहीं छिनी थी.
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
गरिंचा के
📌 Kaynak
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