एग्ज़िट बंद थे और खिड़कियां सील... आग से 21 ज़िंदगियां लेने वाले इस होटल में थीं कई खामियां

📌 Diğer 📰 BBC Hindi 🕐 1 gün önce
एग्ज़िट बंद थे और खिड़कियां सील... आग से 21 ज़िंदगियां लेने वाले इस होटल में थीं कई खामियां

दिल्ली के मालवीय नगर की इमारत में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई है. दमकल विभाग के अधिकारी ने बताया कि इमारत इस तरह बनाई गई थी कि वेंटिलेशन की कोई गुंजाइश नहीं थी. खिड़कियों को स्थाई रूप से सील कर दिया गया था.

कमरे में धुआं भर रहा था और विवेक अग्रवाल का दम घुट रहा था. उन्होंने अपने एक कज़िन को फ़ोन किया और कहा, "हम फंस गए हैं हमें किसी तरह बचा लीजिए."

दिल्ली के मालवीय नगर इलाक़े के एक 'होटल' में बुधवार को लगी आग में गुरुग्राम में रहने वाले अग्रवाल परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई.

पेशे से सीए और एक बड़ी कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत विवेक अग्रवाल के रिश्तेदार अजय गुप्ता ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "बुधवार को हमारा परिवार होटल, अस्पताल और मॉर्चरी के चक्कर लगाता रहा. पूरा परिवार ख़त्म हो गया है."

विवेक अग्रवाल के पिता का इलाज साकेत के मैक्स अस्पताल में चल रहा था और उनका परिवार पास ही एक होटल में ठहरा था. उनके तीन रिश्तेदार बुधवार सुबह ही राजस्थान से पहुंचे थे. उनकी मौत भी इस हादसे में हो गई.

बुधवार सुबह मालवीय नगर में फ्लरिश बीएनबी (बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट) के नाम से संचालित होटल में लगी आग में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 11 विदेशी नागरिक हैं.

बुधवार देर शाम दिल्ली पुलिस ने इस होटल के संचालक लवकेश बजाज को गिरफ़्तार कर लिया.

ये इमारत जिसे 'होटल' कहा जा रहा है दस्तावेज़ों में यह होटल के रूप में दर्ज नहीं है.

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दिल्ली दमकल विभाग के मुताबिक़, होटल संचालक ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया था. इसके अलावा होटल में फ़ायर सिस्टम भी नहीं था.

दिल्ली के चीफ़ फ़ायर ऑफ़िसर अभिलाष मलिक के मुताबिक़, इस होटल को दिल्ली के पर्यटन विभाग ने बीएंडबी का लाइसेंस दिया था और फ़ायर विभाग से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी.

अभिलाष मलिक के मुताबिक़, "इमारत में एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर पांच मंज़िलें हैं. बेसमेंट में दो कमरे थे, हर मंज़िल पर पांच कमरे थे और टैरेस पर भी चार कमरे थे जिनमें से दो का इस्तेमाल गेस्टरूम की तरह किया जा रहा था."

यहां लगी आग को बुझाना और लोगों को रेस्क्यू करना इमारत की बनावट की वजह से बहुत चुनौतीपूर्ण था.

दिल्ली फ़ायर सर्विस के मुताबिक़, सुबह 8 बजकर 51 मिनट पर मदद के लिए कॉल मिली थी और कुछ ही मिनटों में फ़ायर टेंडर रवाना कर दिए गए थे.

बीबीसी ने घटनास्थल पर रिकॉर्ड किए गए कई ऐसे वीडियो देखें है जिनमें सुबह दस बजकर 50 मिनट के बाद भी लोगों को इमारत से बाहर निकाले जाते हुए देखा जा सकता है.

बीबीसी ने घटनास्थल पर रिकॉर्ड किए गए कई ऐसे वीडियो भी देखें है जिनमें लोग इमारत से कूदकर जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

अभिलाष मलिक ने बचावकर्मियों के सामने आई मुश्किलों के बारे में मीडिया से कहा, "हमें इस आग को बुझाने में चुनौतियां आईं लेकिन चुनौतियां यहां ठहरे लोगों के लिए ज़्यादा थीं."

"बिल्डिंग को इस तरह बनाया गया था कि यहां ठहरे लोगों के लिए निकलने की संभावना ना के बराबर थी. खिड़कियों को स्थायी रूप से सील कर दिया गया था और वेंटिलेशन की कोई गुंज़ाइश नहीं थी."

उन्होंने कहा, "ऐसी इमारत शाफ़्ट की तरह काम करती हैं. आग लगने के कुछ सेकंड के अंदर ही इमारत में गर्मी और धुआं भर जाता है

📌 Kaynak

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