बीई और बीटेक: इंजीनियरिंग के इन दोनों कोर्स में क्या कोई फ़र्क़ होता है?
कई यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग कोर्स को बीई कहती हैं और कई संस्थान बीटेक. मगर इन दो अलग-अलग कोर्स के पीछे क्या लॉजिक होता है?
दीप्तिमान पूर्बे हैदराबाद में एक बड़ी कंपनी में इंजीनियरिंग मैनेजर हैं. वहीं, पंकज बिष्ट पुणे यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद नासिक में एक बड़ी टेक कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हैं.
दोनों का काम कमोबेश एक सा है. दोनों कहलाते भी इंजीनियर हैं. दोनों की ब्रांच भी इलेक्ट्रिकल ही थी. मगर दोनों यहां तक पहुंचे अलग-अलग कोर्स के ज़रिए. एक ने बीटेक (B.Tech) चुना और दूसरे ने बीई (B.E).
ऐसे भी किसी ने साइंस फ़ील्ड से पढ़ाई की हो या नहीं, आगे चलकर इंजीनियरिंग की हो या नहीं मगर इससे जुड़े दो कोर्स के नाम ज़रूर सुने होंगे, बीई (B.E) और बीटेक (B.Tech).
मगर ये दो अलग-अलग कोर्स के पीछे क्या लॉजिक होता है? क्या सचमुच ये दोनों डिग्रियां एक सी हैं या पढ़ाई के तरीके, कोर्स के एप्रोच या इसके मक़सद में कोई फ़र्क होता है?
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करियर कनेक्ट सिरीज़ की इस कड़ी में यही कन्फ़्यूज़न दूर करने की कोशिश करेंगे दोनों कोर्सेज़ को पढ़ने और पढ़ाने वालों के ज़रिए.
बीई यानी बैचलर्स ऑफ़ इंजीनियरिंग और बीटेक यानी बैचलर्स ऑफ़ टेक्नोलॉजी. ये तो सबको मालूम है.
लेकिन बीटेक से ये बस इस मायने में अलग है कि इसमें प्रैक्टिकल की बजाय थियोरिटिकल नॉलेज पर ज़्यादा फ़ोकस होता है.
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आईआईटी कानपुर के प्रोफ़ेसर शलभ स्टैस्टिक्स और डेटा साइंस में जाना-माना नाम हैं. वह कहते हैं कि बीई और बीटेक को ऐसे ही समझ लीजिए कि बीई पहले इस्तेमाल होने वाली टर्मिनोलॉजी थी जिसे अब भी कुछ संस्थान इस्तेमाल कर रहे हैं. मगर पढ़ाई में कोई फ़र्क नहीं रह गया है और न ही इसमें दाख़िला लेने वालों के लिए पात्रता की शर्तें ही अलग हैं.
दीप्तिमान पूर्बे इन दिनों ऊबर कंपनी में इंजीनियरिंग मैनेजर हैं. इसके साथ वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी यानी IIIT ग्वालियर में गेस्ट फ़ैकल्टी के तौर पर पढ़ाने भी जाते हैं.
उन्होंने बताया, "पहले ऐसा था कि बीई को नॉलेज ओरिएंटेड कोर्स समझा जाता था. जिसमें फ़ोकस थियोरेटिकल प्रिंसिपल्स पर होता था. यानी चीज़ें क्यों काम करती हैं. जबकि बीटेक को ज़्यादा प्रैक्टिकल और स्किल-ओरिएंटेड माना जाता है, जिसमें ये सिखाया जाता है कि चीज़ें कैसे काम करती हैं."
पंकज बिष्ट जियो में असिस्टेंट मैनेजर हैं. उन्होंने साल 2014 में बीई किया था.
वह भी यही कहते हैं कि भारत में बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग और बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दोनों ही बराबर माने जाते हैं.
उनका कहना है, "बीई का करिकुलम थोड़ा ट्रेडिशनल है और ये कोर्स अक्सर पुरानी यूनिवर्सिटी में चलता है. इसमें फंडामेंटल्स यानी बुनियादी चीज़ों पर थोड़ा ज़्यादा फ़ोकस रहता है. जबकि बीटेक का सिलेबस अपडेटेड है. इसमें लैब, प्रोजेक्ट्स और इंटर्नशिप पर फ़ोकस ज़्यादा है. आईआईटी, एनआईटी और प्राइवेट कॉलेजों में बीटेक ही करवाया जाता है."
भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाने वाले सभी टेक्निकल संस्थानों की निगरानी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी A
📌 Kaynak
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