ममता को अब भी अपना नेता बताने वाले ऋतब्रत कैसे बने उनके सियासी करियर का 'सबसे बड़ा संकट'

📌 Diğer 📰 BBC Hindi 🕐 1 gün önce
ममता को अब भी अपना नेता बताने वाले ऋतब्रत कैसे बने उनके सियासी करियर का 'सबसे बड़ा संकट'

पार्टी से निकाले जाने के महज़ दो दिनों के भीतर युवा विधायक ऋतब्रत बनर्जी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा संकट कैसे बन गए?

बुधवार को पार्टी के 58 से ज़्यादा विधायकों के समर्थन से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का नेता चुन लिया गया. यह विडंबना ही है कि ऋतब्रत के राजनीतिक करियर की यह ऊंचाई ममता बनर्जी के लंबे राजनीतिक करियर के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई है.

करीब 28 साल पहले तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद पार्टी के तमाम फ़ैसले ममता ही लेती रही हैं. यह पहली बार है कि किसी दूसरी पार्टी (सीपीएम) से आने वाले एक नेता ने पार्टी से निकाले जाने के बाद उसके दो-तिहाई विधायकों को अपने खेमे में कर लिया है.

वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई) से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले ऋतब्रत की ख़ासियत यह है कि वह जिस पार्टी में रहे शीर्ष नेताओं के 'ब्लू आइड बॉय' (चहेते व्यक्ति) रहे. वह चाहे वाममोर्चा सरकार में मुख्यमंत्री रहे बुद्धदेव भट्टाचार्य हों या फिर उसके बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी.

बीते करीब एक दशक के दौरान उनके राजनीतिक करियर का उतार-चढ़ाव किसी को भी अचरज में डाल सकता है.

बीते महीने विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सार्वजनिक तौर पर सलाहकार संस्था आई-पैक और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ख़ासकर महासचिव अभिषेक बनर्जी को कटघरे में खड़ा करने वाले ऋतब्रत ने एक महीने के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस को दो-फाड़ की हालत में पहुंचा दिया है.

इससे बंगाल के राजनीतिक हलकों में चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या वह यहां के एकनाथ शिंदे साबित होंगे.

ऋतब्रत के नेतृत्व में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने विधानसभा में बैठक के बाद विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा जिसमें ऋतब्रत को विधायक दल का नेता चुनने की बात कही गई थी.

इस रिपोर्ट को आगे बढ़ाने से पहले ऋतब्रत के राजनीतिक करियर पर एक निगाह डालना ज़रूरी है.

15 नवंबर 1979 को कोलकाता के बंगाली परिवार में जन्मे ऋतब्रत के पिता का नाम प्रिय भूषण बनर्जी और माता का नाम अर्चना बनर्जी है.

साउथ प्वाइंट स्कूल से शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए कोलकाता के ही आशुतोष कॉलेज में दाखिला लिया. उसी दौरान वह एसएफ़आई के सदस्य बने और पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे.

शुरुआती दौर में उनकी मां अर्चना बनर्जी भी उनके कार्यक्रमों में नज़र आती थीं लेकिन उनके पिता सार्वजनिक तौर पर ज़्यादा नहीं दिखे.

फ़िलहाल माता-पिता के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन उच्च-मध्य वर्गीय यह परिवार दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके में रहता है.

ऋतब्रत ने ग्रेजुएशन के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और अंग्रेज़ी साहित्य में एमए की डिग्री हासिल की. 90 के दशक में एसएफ़आई से राजनीतिक करियर शुरू करने वाले ऋतब्रत आशुतोष कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे.

अपनी सांगठनिक क्षमता के बूते वर्ष 2008 में वह एसएफ़आई के राष्ट्रीय महासचिव बन गए. उन्होंने तब तक सीपीएम के प्रमुख युवा चेहरे के तौर पर अपनी पक्की पहचान बना ली थी.

विश्वविद्यालय की पढ़ाई के दौरान ही बुद्धदेव भट्टाचार्य समेत पार्टी के कई नेताओं से उनकी न

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