ओएसएम विवाद : तीन छात्र जो सवाल पूछने में सीबीएसई के 'गुरु' निकले
ओएसएम को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि करीब चार लाख स्टूडेंट्स ने सीबीएसई से अपनी स्कैन्ड कॉपियां मांगीं. स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि कई कॉपियां धुंधली, ब्लैंक और बदली पाई गईं.
ओएसएम (ओएसएम) - एक महीने पहले तक जेन ज़ी के लिए इस शब्द का मतलब ऑसम यानी कमाल था. लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई के 12वीं बोर्ड के नतीजों ने कई छात्रों के लिए तब कुछ कमाल का नहीं छोड़ा जब उनके जीवन में एक नया 'ओएसएम' आया.
ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी ओएसएम, एक डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया है जिसे सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड की आंसर शीट्स जांचने के लिए इस्तेमाल किया था.
बोर्ड ने कहा कि इसका मक़सद कॉपी की जांच को तेज़ी से और कम से कम ग़लतियों के साथ किया जाना है.
लेकिन ओएसएम को लेकर उस वक़्त विवाद हुआ जब करीब चार लाख स्टूडेंट्स ने सीबीएसई से अपनी स्कैन्ड कॉपियां मांगीं. स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि कई कॉपियां धुंधली, ब्लैंक और बदली पाई गईं.
मामले ने तूल पकड़ा और सोशल मीडिया पर देश भर के छात्रों ने मानो मामला अपने हाथ में ले लिया.
इनमें से तीन छात्रों ने कुछ ऐसी बातें सामने रखीं जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय को सीबीएसई के चेयरमैन का तबादला करने जैसे बड़े कदम उठाने पडे़.
एक इंटरव्यू से पहले कैमरे में देखकर अपने बाल व्यवस्थित करते दिखे 18 साल के सार्थक सिद्धांत ने सीबीएसई के मार्किंग सिस्टम की अव्यवस्था पर 31 सांसदों के सामने अपनी बात रखी.
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
मूल रूप से रांची, झारखंड के रहने वाले सार्थक ने कोडिंग और रिसर्च स्किल के ज़रिए सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली ओएसएम यानी ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम और उससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां होने का दावा किया था.
सार्थक ने अपने ब्लॉग पोस्ट में विस्तार से लिखा कि किस तरह सीबीएसई ने टेंडर नियमों में बार-बार बदलाव करके एक विवादित कंपनी को आंसर शीट्स के मूल्यांकन का ठेका दिया.
अंग्रेज़ी में लिखे सार्थक के इस ब्लॉग का शीर्षक है कि 'किस तरह सीबीएसई ने कोएम्प्ट एडुटेक के लिए नियमों में फेरबदल किए.'
इसमें सार्थक ने बताया कि किस तरह लगातार तीन टेंडर राउंड्स में पात्रता और तकनीकी ज़रूरतों को बेहद ही व्यवस्थित तरीके से बार-बार बदला गया ताकि हैदराबाद की कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को फ़ायदा पहुंचे जिसे आखिरकार टेंडर मिला.
सार्थक ने यह भी लिखा कि यह कहानी बताती है कि किस तरह एक बड़े सरकारी संस्थान ने अपने नियमों को फिर से लिखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया.
सार्थक ने सिर्फ दावे ही नहीं किए बल्कि एक टेंडर टाइमलाइन बनाई जिसमें बिंदुवार समझाया कि किस तरह अपने पसंदीदा वेंडर को टेंडर देने के लिए घालमेल किए गए.
हालांकि कंपनी और सीबीएसई ने इन आरोपों का खंडन किया लेकिन तब तक बात निकल चुकी थी.
सोशल मीडिया पर सार्थक का यह ब्लॉग वायरल हो चुका था. इन दावों के बाद संसदीय की एक स्थायी समिति ने उन्हें बुलावा भेजा जिसके अध्यक्ष कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह हैं.
सार्थक ने संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखी और पीटीआई के मुताबिक़ इस बैठक में सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह, स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार के साथ ही शिक्षा मंत्रालय और बोर्ड से जुड़े अन्य
📌 Kaynak
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