ट्रंप चाहते हैं कि जंग ख़त्म हो, लेकिन ईरान झुकने को क्यों तैयार नहीं

📌 Diğer 📰 BBC Hindi 🕐 3 gün önce
ट्रंप चाहते हैं कि जंग ख़त्म हो, लेकिन ईरान झुकने को क्यों तैयार नहीं

डोनाल्ड ट्रंप के पास इस स्थिति से निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं है और ईरानी सरकार भी यही चाहती है कि हालात ऐसे ही बने रहें.

अमेरिका और ईरान दोनों ने संकेत दिए हैं कि वे 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम के बाद रुकी हुई जंग दोबारा शुरू नहीं करना चाहते.

इस बीच दोनों के बीच समय-समय पर हुई सैन्य झड़पों के बावजूद पाकिस्तान, क़तर और कुछ अन्य देशों की मध्यस्थता में जारी बातचीत बंद नहीं हुई है.

अमेरिका के पास अब भी ईरान पर हमला करने की क्षमता वाली ताक़तवर नेवी और एयरफ़ोर्स मौजूद है.

यह मानकर चलना सुरक्षित होगा कि ईरानी शासन ने अपनी सेनाओं को पूरी तरह सतर्क रखा होगा और सीज़फायर का इस्तेमाल अमेरिकी और इसराइली हमलों से हुए नुक़सान की भरपाई के लिए कर रहा होगा.

इसका इस्तेमाल वो अपनी सैन्य व्यवस्था को भी दोबारा मज़बूत करने के लिए कर रहा होगा.

खाड़ी क्षेत्र और उसके आसपास बनी सैन्य तनातनी दोनों पक्षों के लिए ग़लत आकलन और ग़लतफ़हमी का बड़ा ख़तरा पैदा करती है.

अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है ताकि वह रियायतें देने को मजबूर हो.

इसके लिए अमेरिका अपनी सैन्य ताक़त और हमले की क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है.

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

वहीं ईरान अमेरिका को यह संदेश दे रहा है कि उसका प्रतिरोध करने का संकल्प कमज़ोर नहीं पड़ा है.

ज़रूरत पड़ने पर वह अरब देशों में अमेरिकी ठिकानों के बुनियादी ढाँचे को निशाना बना सकता है.

ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी व्यापक समझौते का पहला लक्ष्य क्या होगा.

ये लक्ष्य होगा युद्धविराम को जारी रखना और आगे की बातचीत के एजेंडे पर एक 'सहमति पत्र' तैयार करना.

इसराइल ने ये घोषणा की है कि उसके बमवर्षक विमान फिर से बेरूत पर हमला करेंगे. इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विकल्प और सीमित हो गए हैं.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को इस बात की चिंता नहीं होगी कि लेबनान में उनका नया सैन्य अभियान अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को और मुश्किल बना सकता है.

उनके लिए अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला कोई भी समझौता ख़राब समझौता है.

ईरान अब भी लेबनान में अपने सहयोगी और प्रतिनिधि संगठन हिज़्बुल्लाह का समर्थन करता है.

ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ किसी बड़े समझौते में इसराइली सैन्य अभियान को समाप्त करना भी शामिल होना चाहिए.

इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल को संयम बरतने के लिए कहा है.

जहाँ तक होर्मुज़ स्ट्रेट का सवाल है, उसे फिर से खोलने के बदले ईरान कुछ क़ीमत वसूलना चाहेगा.

यह क़ीमत प्रतिबंधों में राहत या उसकी फ़्रीज़ संपत्तियों को छुड़ाने के तौर पर हो सकती है.

गंभीर बातचीत की शुरुआत के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट का खुलना ज़रूरी माना जा रहा है.

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया था. अब इस अहम समुद्री मार्ग से बहुत कम जहाज़ गुज़र पा रहे हैं.

सऊदी अरब कुछ तेल को पाइपलाइन के ज़रिए लाल सागर के बंदरगाहों तक पहुँचा रहा है.

वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पास भी एक पाइपलाइन है, जो होर्मुज़ स्ट्रेट से आगे ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित उसके ट

📌 Kaynak

Bu özet BBC Hindi kaynağından otomatik derlenmiştir. Tamamı için orijinal habere gidin.

Orijinal haberi oku →
← Tüm haberlere dön