भारतीय नौसेना का क्रूजर वॉरशिप होगा समंदर में महाकिलर, जानिए ताकत

📌 Diğer 📰 AajTak (HI) 🕐 2 saat önce

भारतीय नौसेना का प्रोजेक्ट 18 अब डेस्ट्रॉयर नहीं रहा. क्रूजर स्तर का युद्धपोत बन गया है. 144 VLS सेल, लेजर हथियार, ब्रह्मोस, कुशा मिसाइल और स्वदेशी रडार से लैस जहाज समंदर का महाकिलर होगा.

भारतीय नौसेना अब पारंपरिक विध्वंसक युद्धपोत यानी डेस्ट्रॉयर से आगे निकल चुकी है. प्रोजेक्ट 18 मूल रूप से डेस्ट्रॉयर के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह 11 से 13 हजार टन विस्थापन वाला क्रूजर स्तर का विशाल युद्धपोत बन गया है. यह जहाज हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक होगा.

इसमें इतनी एडवांस क्षमताएं भरी जा रही हैं कि यह एक साथ ड्रोन स्वार्म, बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियारों से लड़ने में सक्षम होगा. यह न सिर्फ आज के खतरों के लिए है, बल्कि 2040 और उसके बाद की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: मॉनसून कैसे हुआ बेईमान... पहले अवसर था, अब आपदाएं लेकर आ रहा है

प्रोजेक्ट 18 भारतीय नौसेना की भविष्य की रीढ़ बनेगा. पहले इसे मध्यम आकार के डेस्ट्रॉयर के रूप में सोचा गया था, लेकिन बढ़ते खतरे और नई तकनीकों को देखते हुए डिजाइन को पूरी तरह बदल दिया गया. अब इसका विस्थापन 11 से 13 हजार टन होगा, जो इसे क्रूजर श्रेणी में ला खड़ा करता है.

नौसेना इस प्रोजेक्ट के तहत 10 से 12 जहाज बनाने की योजना बना रही है. कुल लागत 10 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है. यह कार्यक्रम मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का बड़ा उदाहरण बनेगा. जहाज का डिजाइन इतना एडवांस है कि इसमें भविष्य की तकनीकों को आसानी से जोड़ा जा सकेगा.

इस जहाज की सबसे बड़ी ताकत उसके हथियार हैं. इसमें 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल लगाए जाएंगे, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सबसे भारी हथियार वाले जहाजों में इसे शामिल करेगा.

ये हथियार जहाज को दुश्मन के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता देंगे.

यह भी पढ़ें: Air Force Day: काशी विश्वनाथ की नगरी में गंगा के ऊपर वायु सेना का त्रिशूल फॉर्मेशन

प्रोजेक्ट 18 में इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोप्लशन सिस्टम लगाया जाएगा. इससे जहाज ज्यादा चुपके से चल सकेगा. तेज स्पीड मिलेगी और भविष्य में डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (जैसे लेजर) के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध होगी.

जहाज में 50 से 100 kW वाले टैक्टिकल लेजर हथियार शुरू से ही डिजाइन में शामिल किए गए हैं. ये ड्रोन स्वार्म को नष्ट करने में बेहद कारगर साबित होंगे. रडार सिस्टम भी स्वदेशी होगा. DRDO का S-band AESA रडार 500 KM से ज्यादा दूरी पर लक्ष्य को ट्रैक कर सकेगा. यह रडार दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को बहुत पहले पहचान लेगा.

इस जहाज में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा. इससे न सिर्फ विदेशी निर्भरता कम होगी बल्कि भारतीय उद्योग को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा. जहाज पर ऑटोमेशन की वजह से क्रू की संख्या 25 से 30 प्रतिशत कम कर दी गई है. इससे ऑपरेशन ज्यादा कुशल बनेगा. नौसेना का लक्ष्य है कि यह जहाज पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक पर आधारित हो और भविष्य में निर्यात भी किया जा सके.

यह भी पढ़ें: बॉर्डर पर बैठे अपने ही घुसपैठियों को देख बौखलाया बांग्लादेश, भारत पर लगाया ये आरोप

आज के युद्धक्षेत्र में खतरे बदल चुके हैं. ड्रोन स्वार्म, हाइपरसोनिक मिसाइलें और बैलिस्टिक हमले आम हो गए हैं. प्रो

📌 Kaynak

Bu özet AajTak (HI) kaynağından otomatik derlenmiştir. Tamamı için orijinal habere gidin.

Orijinal haberi oku →
← Tüm haberlere dön