सिंघम कॉप से कॉमन मैन, राजनीति के नए अवतार में अन्नामलाई
तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान बन चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देकर 'कॉमन मैन' के रूप में एक नए और अनोखे राजनीतिक सफर की शुरुआत की है. 'वी द लीडर्स' नाम से एक नए डिजिटल आंदोलन की नींव रखकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वे राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति और बीजेपी के केंद्रीय ढर्रे, दोनों से अलग एक नया विकल्प तैयार करना चाहते हैं.
19 मई को के. अन्नामलाई ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं को सीखना अनिवार्य करने के सीबीएसई (CBSE) के फैसले पर बीजेपी की स्थापित लाइन से अलग हटकर बात की. उन्होंने इस कदम की आलोचना करते हुए रेखांकित किया कि बोर्ड अपने उस पिछले ऐलान से पीछे हट रहा है, जिसमें कहा गया था कि इसे केवल शैक्षणिक वर्ष 2029-30 से लागू किया जाएगा. अन्नामलाई ने तर्क दिया कि कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं सीखने के लिए कहना उनके मानसिक तनाव का कारण बनेगा और उन्होंने इस आदेश को वापस लेने की मांग की.
यह पहला संकेत था कि आईपीएस अधिकारी से नेता बने अन्नामलाई, जिन्हें आमतौर पर पार्टी की नीतियों का पूरी वफादारी से पालन करने और नरेंद्र मोदी के कसीदे पढ़ने के लिए जाना जाता था, अब कुछ अलग सुर अलाप रहे थे. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि यह इस एहसास की अभिव्यक्ति थी कि यदि कोई तमिलनाडु की राजनीति में सफल होने की महत्वाकांक्षा रखता है, तो उसके लिए 'तमिल फर्स्ट' का ढर्रा अपनाना बेहद जरूरी है.
2 जून का उनका इस्तीफा पत्र इस मतभेद को बिल्कुल साफ कर देता है. यह रेखांकित करते हुए कि राष्ट्रीय पार्टियां कभी भी वह भाषा नहीं बोल पाईं, जिसे तमिलनाडु के लोग समझ सकें. उन्होंने कहा कि बीजेपी में अपने कार्यकाल के दौरान इस धारणा को बदलने की कोशिश की थी, लेकिन जब वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि तमिलनाडु को लेकर उनके और पार्टी नेतृत्व के विचार एक जैसे नहीं हैं तो अन्नामलाई ने राहें जुदा कर लेना ही सबसे बेहतर समझा.
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इस्तीफा देते समय अन्नामलाई ने कुछ ऐसा किया जो आम तौर पर देखने को नहीं मिलता. बीजेपी आलाकमान से अपने रिश्ते पूरी तरह खराब न करने की इच्छा के चलते, उन्होंने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात में वक्त बिताया, जबकि दूसरी तरफ यह अटकलें तेज थीं कि शायद उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मना लिया जाएगा. आखिरकार, कई दौर की इन 'एग्जिट वार्ताओं' से कुछ हासिल नहीं हुआ या तो पार्टी की तरफ से कोई वैकल्पिक प्रस्ताव नहीं दिया गया या फिर मतभेद इतने गहरे हो चुके थे कि किसी भी तरह की मान-मनौव्वल उनका मन बदलने के लिए काफी नहीं थी. असल में, अन्नामलाई ने अपने वीडियो संदेश में इस बात का जिक्र भी किया कि वह पिछले साल दिसंबर में ही पार्टी छोड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें तमिलनाडु के चुनाव खत्म होने तक पद पर बने रहने के लिए मना लिया गया था.
यहां से अन्नामलाई अब कहां जाएंगे? क्या वह राजनीति के ढलते सूरज की तरह ओझल हो जाएंगे, या फिर लगातार मिले चुनावी झटकों की राख से एक फिनिक्स की तरह फिर से उठ खड़े होंगे?
उनका तात्कालिक पड़ाव एक वेबसाइट है 'वी द लीडर्स' (We the Leaders) जो जनता के अपने आंदोलन को खड़ा करने की बात करती है. अपनी प्रस्तावना में बेहद ऊंचे लक्ष्य रखने वाले इस मंच को लेकर अन्नामलाई का कहना है कि उनका उद्देश्य ऐसे कई जन-नेता तैयार करना है जो सही मुद्दों के लिए लड़ सकें. यह वेबसाइट शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थिरता और युवा नेतृत्व जैसे मुद्दो
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