मणिपुर से इजरायल तक: डर पर भारी पड़ा दो सगी बहनों का हौसला और रोजगार

📌 Diğer 📰 AajTak (HI) 🕐 2 saat önce

हिंसाग्रस्त मणिपुर की दो भारतीय बहनों ने युद्धग्रस्त इजरायल में खतरों के बावजूद 'केयरगिवर' का काम करना चुना. कमाई की मजबूरी और दोनों जगहों पर सुरक्षा की अनिश्चितता उनके इस साहसिक फैसले की मुख्य वजह है.

जब विमान ने इजरायल के तेल अवीव शहर में लैंड किया, तो केबिन से अपना बैग निकालते समय मेरी नजर दिल्ली से यात्रा कर रही एक मध्यम आयु वर्ग की भारतीय महिला पर पड़ी, जिसके चेहरे पर एक बेहद प्यारी मुस्कान थी. उसके साथ वैसी ही दिखने वाली एक और महिला भी सफर कर रही थी. विमान से उतरकर जब हम इमिग्रेशन काउंटर की लंबी कतार में खड़े हुए, तो हमारी बातचीत शुरू हुई. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं इजरायल में रहती हूं? मैंने जवाब दिया, नहीं मैं यहां एक आधिकारिक काम से आई हूं. इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं यहां रहकर काम करती हूं.

इमिग्रेशन की लंबी लाइन ने हमें एक-दूसरे को और करीब से जानने का मौका दिया. बातचीत में पता चला कि उनका नाम रीना है. वह भारत के मणिपुर राज्य की रहने वाली हैं. रीना पिछले तीन वर्षों से इजरायल में एक 'केयरगिवर' (देखभाल करने वाली) के रूप में काम कर रही हैं.

यह भी पढ़ें: मिग-29K के लिए स्वदेशी 80mm एयरो रॉकेट बनाने की बड़ी तैयारी, घरेलू कंपनियों को न्योता

उन्होंने अक्टूबर 2023 में हमास के नरसंहार के बाद इजरायली रक्षा बलों की सैन्य कार्रवाइयों, पिछले साल ईरान के साथ हुए युद्ध और इस साल 2026 में भी जारी तनाव को बेहद करीब से देखा है. रीना जहां तेल अवीव में एक परिवार के साथ काम करती हैं. वहीं उनकी सगी बहन पूनम इजरायल के ही एक अन्य शहर एशडोड में केयरगिवर के तौर पर कार्यरत हैं.

जब मैंने रीना से पूछा कि क्या वह ईरानी मिसाइल हमलों के दौरान इजरायल में ही थीं, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के 'हां' में सिर हिलाया. वह उस खौफनाक मंजर की गवाह रही हैं. जून 2025 में ईरान-इजरायल के बीच चले 12 दिनों के भीषण युद्ध के दौरान, जब हर दिन सैकड़ों सायरन बजते थे. लोगों को दिन में कई-कई बार बंकरों में शरण लेनी पड़ती थी. कई भारतीय वहीं मौजूद थे. विदेशी पत्रकारों के लिए यह युद्ध को कवर करने का एक जरिया था, लेकिन रीना और पूनम जैसी हजारों भारतीय महिलाएं अपनी नौकरी और मजबूरी के कारण इस युद्ध के बीच फंसी हुई थीं.

उस दौरान भारत सरकार और इजरायल में मौजूद भारतीय दूतावास ने 'ऑपरेशन' चलाकर हजारों भारतीयों को सुरक्षित वतन वापस भेजा था, लेकिन इसके बावजूद कई लोगों ने इजरायल में ही रुकने का फैसला किया. रीना और पूनम भी उन्हीं हौसलेमंद लोगों में से थीं. ये दोनों बहनें एक महीने की छुट्टी बिताकर अपने परिवार से मिलने के बाद दोबारा इजरायल लौट रही थीं.

यह भी पढ़ें: भारत बना रहा समंदर का महाकिलर, PAK की बंध जाएगी घिग्घी, चीन भी डरेगा

उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित होकर जब मैंने उनसे पूछा कि क्या वे घर से 3500 मील दूर युद्ध के इस माहौल में रहने को लेकर डरी हुई नहीं हैं? तो उनके जवाब ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया. दोनों बहनों ने कहा कि भारत में हमारा घर मणिपुर में है. हमारा इलाका पिछले कुछ सालों से भारी विवाद और जातीय हिंसा की चपेट में है.

हमने अपने घर में भी तनाव का ऐसा ही माहौल देखा है. जब हम छुट्टी पर मणिपुर गए थे, तो वहां हर तरफ कर्फ्यू लगा हुआ था. हम घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे थे. सुरक्ष

📌 Kaynak

Bu özet AajTak (HI) kaynağından otomatik derlenmiştir. Tamamı için orijinal habere gidin.

Orijinal haberi oku →
← Tüm haberlere dön