भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध, कौन थे बरकतुल्ला भोपाली?

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भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध, कौन थे बरकतुल्ला भोपाली?

कुछ लोग इस फ़ैसले को भोपाल और मालवा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे देश के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण सेनानी की विरासत को कमज़ोर करने की कोशिश बता रहे हैं.

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम "मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" करने की तैयारी शुरू हो गई है.

विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इस संबंध में बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेज दिया है.

प्रस्ताव के मुताबिक़ राजा भोज की ऐतिहासिक विरासत के साथ ही साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा.

बैठक में मौजूद कार्य परिषद सदस्य और विश्वविद्यालय की अरबी-पर्शियन विभाग की प्रमुख डॉक्टर ताहिरा अब्बासी ने प्रस्ताव का विरोध किया है.

उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली ख़ुद एक स्वतंत्रता सेनानी थे, इसलिए इस विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदला जाना चाहिए.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने नाम बदलने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

हालांकि अंतिम रूप से नाम में बदलाव लागू होने के लिए राज्य सरकार और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं की औपचारिकताएं पूरी की जानी बाक़ी हैं.

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉक्टर एबी सिंह ने पत्रकारों को बताया कि नाम बदलने के संबंध में जो फ़ैसला लिया गया है उसका प्रस्ताव जल्द ही शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

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यह प्रस्ताव सामने आते ही प्रदेश में एक नई बहस शुरू हो गई है.

इस फै़सले के पक्ष में लोग जहां इसे भोपाल और मालवा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर देख रहे है, तो दूसरी तरफ़ इसे देश की स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण सेनानी की विरासत को कमजोर करने का प्रयास बता रहे है.

बीबीसी से बात करते हुए डॉक्टर ताहिरा अब्बासी ने बताया, " बैठक में मैंने कहा था कि आप अगर राजा भोज के नाम पर रखना चाहते हैं तो उसके लिये एक बड़ा और नया विश्वविद्यालय बनाएं क्योंकि राजा भोज जैसे व्यक्ति बहुत बड़े थे उनके नाम के मुताबिक़ यह बनाया जाना चाहिए. साथ ही आप बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को भी नहीं भुला सकते इसलिए इसका नाम वैसे ही रहने दें."

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के तौर पर हुई थी.

बाद में साल 1988 में इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी चिंतक मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था.

विश्वविद्यालय प्रबंधन और नाम परिवर्तन के समर्थकों का कहना है कि नया नाम क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त करेगा.

लेकिन कई इतिहासकार, बुद्धिजीवी और राजनीतिक नेता नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं.

इतिहासकार एस. इरफान हबीब ने एक्स पर लिखा है, ''यह अत्यंत पक्षपातपूर्ण और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है. लेकिन आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि सत्ता में बैठे लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करना कब सीखा है? उनके लिए मौलाना बरकतुल्ला ख़ान केवल एक मुसलमान थे और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बना दी गई."

वही इतिहासकार और लेखिका राणा सफ़वी ने लिखा है, "मौलाना बरकतउल्ला ने अपने देश की आज

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