गोविंदा की परछाईं से निकले बिना हो पाएगा वरुण धवन का भला?
वरुण धवन की नई फिल्म है जवानी तो इश्क होना है बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को तरस रही है. फिल्म में वरुण का वही पुराना 90s वाला 'गोविंदा स्टाइल' कॉमिक अंदाज नजर आ रहा है, जिससे अब फैंस बोर हो चुके हैं. बदलापुर और अक्टूबर जैसी फिल्मों में वरुण के एक्सपेरिमेंट को पसंद कर चुकी जनता उनके 'गोविंदा टाइप' स्टाइल को कबतक स्वीकार करेगी?
वरुण धवन की हालिया रिलीज फिल्म 'जवानी तो इश्क होना है' बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित करने में विफल साबित हो रही है। इस फिल्म में अभिनेता का वही पुराना 90 के दशक वाला गोविंदा-शैली का मजाकिया अंदाज देखने को मिल रहा है, जो अब दर्शकों को नया नहीं लग रहा है। समीक्षकों का मानना है कि दर्शक अब वरुण के इस घिसे-पिटे अंदाज से ऊब चुके हैं। जबकि 'बदलापुर' और 'अक्टूबर' जैसी फिल्मों में वरुण के अभिनय प्रयोगों को काफी सराहा गया था, लेकिन बार-बार एक ही तरह के किरदार निभाना उनके करियर के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह स्पष्ट है कि वरुण को अपनी छवि बदलने और नए तरह के किरदारों पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि वे अपनी लोकप्रियता बनाए रख सकें।
यह खबर वरुण धवन के फिल्मी करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर इशारा करती है, जहां उन्हें अपनी अभिनय शैली में बदलाव की सख्त जरूरत है।
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